दत्तात्रेय धाम के पास हत्या कर नदी में फेंकी थी लाश, अदालत ने चार-चार लाख रुपये जुर्माना भी लगाया
आजमगढ़। उधार दिए गए रुपये वापस मांगना एक युवक के लिए जानलेवा साबित हुआ। करीब छह वर्ष पुराने चर्चित हत्या कांड में सुनवाई पूरी करने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-1 अमर सिंह ने तीन आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने प्रत्येक आरोपी पर चार-चार लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। साथ ही जुर्माने की 80 प्रतिशत धनराशि मृतक की पत्नी और बच्चों को देने का आदेश दिया है। अभियोजन पक्ष के अनुसार थाना निजामाबाद क्षेत्र के परानपुर निवासी वादी हरेंद्र चौहान के भाई धर्मेंद्र चौहान महाराष्ट्र के कोल्हापुर में रहकर पोकलेन मशीन चलाने का कार्य करते थे। कोरोना काल के दौरान वह अपने गांव लौट आए थे। धर्मेंद्र ने गांव के ही कपिल कुमार, राजेश यादव और रमेश यादव, निवासी मारूफपुर, थाना निजामाबाद को उधार रुपये दे रखे थे। यह रकम एक लाख रुपये से अधिक हो गई थी। धर्मेंद्र लगातार अपने रुपये वापस मांग रहा था, जिससे तीनों आरोपी नाराज थे। अभियोजन के मुताबिक 4 अगस्त 2020 को तीनों आरोपियों ने धर्मेंद्र को शराब पिलाने के बहाने घर से बुलाया। इसके बाद दत्तात्रेय धाम के पास उसकी हत्या कर दी और साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से शव नदी में फेंक दिया। अगले दिन 5 अगस्त 2020 को धर्मेंद्र का शव नदी से बरामद हुआ था। घटना के बाद पुलिस ने जांच कर तीनों आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता विपिन कुमार गिरि ने 11 गवाहों को न्यायालय में पेश किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने कपिल कुमार, राजेश यादव और रमेश यादव को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास तथा प्रत्येक पर चार-चार लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि जुर्माने की 80 प्रतिशत राशि मृतक के आश्रितों को प्रदान की जाए।
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