नौकरी के नाम पर भेजे गए थे युद्ध क्षेत्र में,परिजनों ने पूरी जांच की माँग की
आजमगढ़: रूस-यूक्रेन युद्ध में फंसे आजमगढ़ के दो युवकों अजरुद्दीन खान और रामचंद्र के अवशेष गुरुवार को ताबूत में उनके घर पहुंचे। दोनों के शव कंकाल जैसी अवस्था में मिलने से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। परिवारों का आरोप है कि युवकों को सुरक्षा गार्ड और अन्य नौकरियों का झांसा देकर रूस भेजा गया था, लेकिन वहां उन्हें युद्ध क्षेत्र में भेज दिया गया। अजरुद्दीन खान पुत्र मैनुद्दीन खान, निवासी गुलामी का पूरा, आजमगढ़ शहर, जनवरी 2024 में रूस गया था। परिवार के अनुसार उसे करीब दो लाख रुपये मासिक वेतन वाली नौकरी का लालच दिया गया था। रूस पहुंचने के बाद उसने बताया था कि उसे जबरन सैन्य प्रशिक्षण देकर युद्ध क्षेत्र में भेजा जा रहा है। अप्रैल 2024 के बाद परिवार का उससे संपर्क टूट गया था। बेटे के युद्ध में फंसने की जानकारी मिलने के बाद उसके पिता मैनुद्दीन खान को दिल का दौरा पड़ा और उनका निधन हो गया। इसी तरह सगड़ी तहसील के आराजी देवारा करखिया निवासी रामचंद्र भी उन भारतीय युवकों में शामिल था जिन्हें रोजगार का झांसा देकर रूस ले जाया गया था। लंबे समय तक दोनों का कोई पता नहीं चला। रूस की ओर से उन्हें पहले “लापता” बताया गया था। बाद में डीएनए और अन्य पहचान प्रक्रिया के बाद उनके अवशेष भारत भेजे गए। परिजनों का कहना है कि ताबूत खोलने पर शव पूरी तरह सुरक्षित नहीं थे और केवल कंकाल जैसी स्थिति में अवशेष मिले। इससे परिवारों का दुख और बढ़ गया। गांव और मोहल्ले में जैसे ही ताबूत पहुंचे, बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए और शोक की लहर दौड़ गई। गौरतलब है कि आजमगढ़ और मऊ के कई युवक वर्ष 2024 में एजेंटों के माध्यम से रूस गए थे। इनमें कुछ की युद्ध में मौत हो चुकी है, कुछ घायल होकर वापस लौटे हैं, जबकि कई युवकों के बारे में लंबे समय तक कोई जानकारी नहीं मिल सकी। अजरुद्दीन खान और रामचंद्र भी उन्हीं युवकों में शामिल थे जिनके परिवार पिछले डेढ़ वर्ष से उनके लौटने की आस लगाए बैठे थे। दोनों युवकों के अवशेष घर पहुंचने के बाद परिजनों ने सरकार से मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा ऐसे एजेंटों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है, जिन्होंने नौकरी का झांसा देकर युवकों को रूस भेजा था।
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