41.93 करोड़ की फर्जी सप्लाई दिखाकर 7.54 करोड़ का इनपुट टैक्स क्रेडिट हड़पने का आरोप
आजमगढ़: जनपद में आर्थिक अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए जीएसटी-एसआईटी, थाना सिधारी व साइबर सेल की संयुक्त टीम ने फर्जी फर्मों के जरिए करोड़ों रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) हड़पने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में पंजाब से दो अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है। पुलिस के अनुसार, इस मामले में पूर्व में दिनांक 07 जुलाई 2025 को जीएसटी विभाग की तहरीर पर थाना सिधारी में मु0अ0सं0 335/2025 धारा 319(2), 318(4), 338, 336(3), 340(2), 61(2), 111 बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। आरोप है कि कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर फर्जी फर्म बनाकर जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट का अनुचित लाभ उठाते हुए सरकारी राजस्व को भारी क्षति पहुंचाई गई। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ0 अनिल कुमार के निर्देश पर तथा अपर पुलिस अधीक्षक यातायात/नोडल अधिकारी साइबर क्राइम विवेक त्रिपाठी व सीओ सिटी के पर्यवेक्षण में साइबर सेल व सिधारी पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए पंजाब राज्य के गोबिंदगढ़ से दो अभियुक्तों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार अभियुक्तों में विकास कुमार पुत्र वेद प्रकाश निवासी वार्ड नंबर-3, गली नंबर-7, दिलीप नगर, खन्ना थाना सिटी-1 जनपद लुधियाना (पंजाब) तथा बलजीत सिंह पुत्र प्रीतम सिंह निवासी इकबाल नगर शाहपुर मुगल मजरा जनपद फतेहगढ़ साहिब (पंजाब) शामिल हैं। पुलिस ने दोनों अभियुक्तों को 29 अप्रैल 2026 को न्यायालय फतेहगढ़ साहिब (पंजाब) से ट्रांजिट रिमांड पर लेकर आज 2 मई 2026 को न्यायालय आजमगढ़ में पेश करने की प्रक्रिया पूरी की। जांच में सामने आया है कि अभियुक्तों ने संगठित सिंडीकेट बनाकर पंकज इंटरप्राइजेज, भोलानाथ इंटरप्राइजेज, शिवम ट्रेडर्स व वी.के. इंटरप्राइजेज जैसी फर्जी फर्में बनाई थीं। इनमें से भोलानाथ इंटरप्राइजेज के माध्यम से उत्तर प्रदेश राज्य कर विभाग के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी कर बड़े पैमाने पर जीएसटी चोरी की जा रही थी। इस फर्जीवाड़े में 41 करोड़ 93 लाख रुपये की आउटवर्ड सप्लाई दर्शाकर करीब 7 करोड़ 54 लाख रुपये के टैक्स क्रेडिट का अवैध लाभ लिया गया, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचा। पुलिस के अनुसार, अभियुक्त विकास कुमार फर्जी फर्म खोलने के लिए अपने दस्तावेज उपलब्ध कराता था, जबकि बलजीत सिंह विभिन्न सिम कार्ड उपलब्ध कराकर इन फर्मों के संचालन में सहयोग करता था। जांच में यह भी सामने आया है कि बलजीत सिंह द्वारा उपलब्ध कराए गए मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल कई फर्जी कंपनियों के संचालन में किया गया। इस कार्रवाई में थाना सिधारी व साइबर सेल की टीम, जिसमें उपनिरीक्षक धर्मेंद्र कुमार सिंह, हेड कांस्टेबल संतोष राम, उपनिरीक्षक रवि प्रकाश गौतम (प्रभारी साइबर सेल), मुख्य आरक्षी ओमप्रकाश जायसवाल, हेड कांस्टेबल मुकेश कुमार भारती, आरक्षी राहुल सिंह, सत्येंद्र यादव व श्याम कुमार शामिल रहे, ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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