अघोरदर्शन के मानवीय मूल्यों को शिक्षा से जोड़ने पर होगा मंथन
आजमगढ़: महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय, आजमगढ़ में 18 अप्रैल (शनिवार) को अघोरपीठ वाराणसी के सहयोग से राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। संगोष्ठी का उद्देश्य शिक्षा, शिक्षक और शिक्षा केंद्र के माध्यम से मानव कल्याण पर आधारित अघोरदर्शन की विचारधारा को जनमानस तक पहुंचाना है। अघोरपीठ सदर शाखा आजमगढ़ के संरक्षक लालबहादुर सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार के निर्देशन में आयोजित इस संगोष्ठी में देश के विभिन्न प्रांतों से आए शिक्षाविद, प्रोफेसर एवं विद्यार्थी भाग लेंगे। संगोष्ठी का विषय “अघोरदर्शन: शिक्षा में समरसता और मानवीय मूल्यों की स्थापना” रखा गया है। उन्होंने बताया कि अघोरदर्शन को आम जनता से जोड़ने का कार्य वर्ष 1961 में अवधूत भगवान राम द्वारा सर्वेश्वरी समूह की स्थापना के माध्यम से किया गया था, जिसका उद्देश्य मानवता, समाज और राष्ट्र का कल्याण करना है। वर्तमान में अघोराचार्य बाबा सिद्धार्थ गौतम राम इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। सुंदरकांड व पूजन के साथ होगा शुभारम्भ अघोरपीठ सदर शाखा के व्यवस्थापक प्रमोद कुमार सिंह ने बताया कि संगोष्ठी से पूर्व सुंदरकांड का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद सुबह 11 बजे विश्वविद्यालय परिसर स्थित मंदिर में स्थापित शिवलिंग का पूजन अघोराचार्य बाबा सिद्धार्थ गौतम राम के करकमलों द्वारा किया जाएगा। संगोष्ठी के समन्वयक डॉ. पंकज सिंह ने बताया कि यदि शिक्षा प्रणाली में अघोरदर्शन के मानवीय मूल्यों को समाहित किया जाए तो समाज में व्याप्त कई बुराइयों को दूर किया जा सकता है। यही इस संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य है। सह-आयोजक भोजपुरी विकास मंच के अध्यक्ष संतोष कुमार सिंह ने इसे जनपद का ऐतिहासिक आयोजन बताते हुए अधिक से अधिक जनसहभागिता की अपील की। इस अवसर पर सुनील दत्त विश्वकर्मा, विपिन सिंह, वीरेंद्र सोनकर, ओमप्रकाश बंटू, धनंजय मन्नू, धर्मेंद्र छोटे, आशीष सोनू, बाला सिंह, अनूप सिंह, गजराज, स्वतंत्र सिंह मुन्ना सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
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