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आजमगढ़:अगर किसान जमीन देने को तैयार नहीं हुए तो देखते हैं कैसे लेंगे - राकेश टिकैत



एयरपोर्ट विस्तारीकरण को किसानों की हरी-भरी खेती वाली जमीनों जबरन नही लेनी चाहिए - किसान नेता

आजमगढ़: मंदुरी स्थित हवाई पट्टी के विस्तारीकरण को लेकर सरकार की तरफ से किसानों की जमीन के अधिग्रहण के प्रस्ताव के विरोध में किसान नेता राकेश टिकैत आज समीप के जमुआ गांवमें किसान पंचायत में पहुंचे। इस दौरान उन्होंने दम भरा कि अगर किसान अपनी जमीन नहीं बेचना चाहते हैं तो कोई उनकी जमीन जबरदस्ती नहीं ले पाएगा और इसके लिए ग्रामीणों को एकजुटता दिखानी होगी। सरकार एक एक कर कमजोर कड़ी को तोड़ने का प्रयास करेगी लेकिन अगर सभी लामबंद रहेंगे तो सरकार कुछ नहीं कर पाएगी और यह आंदोलन तभी खड़ा हो पाएगा, जब लोग अपनी जमीन का अधिग्रहण नहीं कराएंगे। उन्होंने पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम में टाटा फैक्ट्री और राजस्थान के जालौर में अदाणी के रिफाइनरी प्लांट का उदाहरण भी दिया और कहा कि विरोध के चलते लौटना पड़ा। राकेश टिकैत ने कहा कि आजमगढ़ में मंदुरी में जो वर्तमान हवाई पट्टी है उसी से काम चलाना चाहिए। जबरदस्ती विस्तारीकरण के नाम पर किसानों की हरी-भरी खेती वाली जमीनों को नहीं लेना चाहिए। किसान कहां जाएंगे ग्रामीणों को मुआवजे के लालच के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए क्योंकि अगर ऐसा होगा तो फिर आंदोलन नहीं खड़ा हो पाएगा। खुद के बारे में राकेश टिकैत ने कहा कि वह आंदोलन में तभी साथ देंगे जब कोई किसान एक भी जमीन ना बेचे। इसके बाद देखते की सरकार कैसे जमीन लेती है। उन्होंने विपक्षी दलों के नेताओं को भी आवाहन किया कि उनको किसानों के साथ लगातार खड़ा रहना चाहिए। बता दें कि एक दिन पहले ही इस किसान पंचायत में सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटेकर व पूनम पंडित भी आई थी और उन्होंने भी अधिग्रहण के प्रस्ताव के खिलाफ मोर्चा खोला था।

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रिपोर्ट आज़मगढ़ लाइव

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