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आजमगढ़: रावण के अत्याचार से परेशान देवता पहुंचे श्रीहरि दरबार



पुरानी कोतवाली की रामलीला में कलाकारों ने रावण जन्म व अत्याचारों का मंचन किया

27 को सीता जन्म, नगर दर्शन, फुलवारी और मीना बाजार का होगा मंचन

आजमगढ़: नगर के पुरानी कोतवाली में श्रीराम लीला समिति के तत्वावधान में चल रही श्रीरामलीला मेंं रविवार की रात कलाकारों ने रावण जन्म व उसके अत्याचार का मंचन किया। मंचन के दौरान रावण के अत्याचार से परेशान देवी-देवता भगवान विष्णु से रावण के अत्याचार से मुक्ति दिलाने की गुहार लगाने पहुंचते हैं।
श्रीरामलीला मंचन के दूसरे दिन की शुरूआत भगवान विष्णु की आरती उतार की गई। इसके बाद कलाकारों ने रावण जन्म और रावण अत्याचार का मंचन किया। मंचन के क्रम में कलाकारों ने सर्वप्रथम रावण जन्म का मंचन किया। इसके बाद कलाकारों ने रावण अत्याचार का मंचन किया। जिसमें रावण के अत्याचार से धरती पर ऋषि-मुनी और स्वर्ग में देवी-देवता त्राहि-त्राहि करने लगते हैं। रावण के अत्याचार से परेशान देवी-देवता मदद के लिए दर-दर भटकते हैं। इस दौरान आकाश में भ्रमण कर रहे नारद जी को देवताओं को परेशान देखते हैं और उनके पास जाते हैं। पूछने पर देवता नारद को अपनी पीड़ा बताते हैं। तो नारद देवी-देवताओं को भगवान विष्णु के पास जाने की सलाह देते हैं। इस पर सभी देवी-देवता झीर सागर विष्णु जी की शरण में पहुंचते हैं और अपनी समस्या बताते हैं। विष्णु जी देवी-देवताओं की बात को सुन कष्टों से छुटकारा दिलाने का आश्वासन देते हैं। देर रात रामलीला के समापन पर प्रभु श्रीराम की आरती उतारी गई। इस दौरान लगे श्रीराम के जयकारों से पंडाल राममय हो गया था।
श्रीरामलीला समिति के संयोजक विभाष सिन्हा ने बताया कि मंचन के क्रम में 27 सितंबर की शाम आठ बजे से श्री बाबा बैजनाथ श्रीरामलीला मंडल (जनकपुर मिथिला धाम) बिहार के कलाकार सीता जन्म, नगर दर्शन, फुलवारी और मीना बाजार का मंचन करेंगे। यह जानकारी उन्होंने लोगों से समय से उपस्थित होने का आह्वान किया।

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रिपोर्ट आज़मगढ़ लाइव

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