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आज़मगढ़: हुनर रंग महोत्सव के अंतिम दिन तीन नाटकों का मंचन हुआ



नाटक कन्यादान, चरणदास चोर और अथ मनुष जगन ह का हुआ मंचन

आज़मगढ़: हुनर संस्थान ,आजमगढ़ द्वारा प्रतिभा निकेतन स्कूल में चल रहे " हुनर रंग महोत्सव " अखिल भारतीय नाटक एवं लोक नृत्य समारोह के अंतिम दिन तीन नाटकों का मंचन हुआ। पहली प्रस्तुति के रूप में पथ , जमशेदपुर , झारखंड के कलाकारों द्वारा मोहम्मद निजाम के निर्देशन में नाटक 'कन्यादान' का मंचन किया गया। विजय तेंदुलकर द्वारा लिखित इस नाटक का हिन्दी अनुवाद बसंत देव ने किया है। नाटक के माध्यम से समाज में फैले जातिगत भेदभाव पर प्रहार किया गया। ये दिखाया गया कि लोग आदर्शवादी बातें करते हैं, लेकिन सहयोग करने की बात आती है तो पीछे हटते नजर आते हैं। नाटक में दिखाया गया कि आजादी के इतने लंबे समय बाद भी समाज में जाति-वर्ण भेद खत्म नहीं हुआ है।
नाटक की शुरुआत समाजवादी कार्यकर्ता नाथ देवलालीकर से होती है। उसकी बेटी ज्योति को एक दलित युवा अरुण अठवाले से प्यार हो जाता है। वह शादी का प्रस्ताव परिवार के सामने रखती है। देवलालीकर इसे स्वीकार कर लेता है। यह बात ज्योति की मां सेवा मुखर्जी को पसंद नहीं आती। वह सामाजिक कार्यकर्ता है, लेकिन परिवार में आ रहे इस परिवर्तन को स्वीकार नहीं करना चाहती। दो विचारधाराओं के बीच अंर्तविरोध शुरू हो जाता है। एक तरफ समाज में परिवर्तन की बात करती हैं, लेकिन एक दलित युवक से बेटी की शादी होने के खिलाफ खड़ी हो जाती हैं।
ज्योति और अरूण की शादी के कुछ दिन बाद उनकी लड़ाई शुरु हो जाती है। वह शराब के नशे में उससे मारपीट करने लगता है। उसके मन में जातिभेद आ जाता है। वह पति का घर छोड़कर पिता के घर आ जाती है। वहीं अरूण एक पुस्तक के विमोचन के लिए ज्योति के पिता को अध्यक्ष के रूप में बुलाता है। इस दौरान वह भाषण सीटें है जिसकी समीक्षा उनकी बेटी करती है, जिसके बाद वह अरुण के पास वापस चली जाती है। नाटक के प्रमुख पात्रों में मोहम्मद निजाम, छवि दास, आकांक्षा गुप्ता इत्यादि थे । दूसरी प्रस्तुति जागरूक शिक्षण प्रशिक्षण सेवा संस्थान बलिया द्वारा अभय सिंह कुशवाहा के निर्देशन में नाटक " चरणदास चोर" का मंचन किया गया ख्यातिलब्ध नाटककार हबीब तनवीर द्वारा लिखित इस नाटक में चरणदास, एक छोटा सा चोर, अपने जीवन से असंतुष्ट है और ज़िंदगी से भाग रहा है। आखिरकार, वह एक गुरु से मिलता है जो उसे प्रतिज्ञा दिलाता है जो उसे मुक्त कर देंगी। नाटक के प्रमुख कलाकारों में पुनीत पासवान , छोटे लाल प्रजापति, अभय सिंह कुशवाहा, सुमित प्रसाद आशुतोष सिंह ,अजीत यादव, सलोनी कुशवाहा बृजेश राय ,अर्जुन वर्मा राजू यादव थे । तीसरी प्रस्तुति डेट टाटानगर द्वारा अनुज कुमार के निर्देशन में " अथ मनुष जगन ह " का मंचन किया गया नाटक के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों को बांधे रखा। इन प्रस्तुतियों से पूर्व तीसरे दिन की सांस्कृतिक संध्या का उद्घाटन सगड़ी की विधायक बन्दना सिंह, प्रसिद्ध गीतकार मनोज यादव, प्रमोद यादव, रमाकांत वर्मा ने संयुक्त रुप से दीप जलाकर किया । आए हुए सभी अतिथियों का स्वागत स्वागतध्यक्ष समाजसेवी अभिषेक जायसवाल दीनू , संस्थान अध्यक्ष मनोज यादव , हेमंत श्रीवास्तव ,गौरव मौर्य ने किया। वरिष्ठ रंगकर्मी सुनील दत्त विश्वकर्मा ने संचालन व महोत्सव का संयोजन किया। महोत्सव को सफल बनाने में गौरव मौर्य, कमलेश सोनकर करण सोनकर, अमरजीत विश्वकर्मा, सावन प्रजापति, प्रियांशु सोनकर ,इंद्रजीत निषाद सहित सभी संस्थान के कलाकार लगे रहे।

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रिपोर्ट आज़मगढ़ लाइव

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