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जब खतरा कम था तब सतर्कता थी, अब हालात भयावह तो बेपरवाह हुए हम: डॉ. डी.डी. सिंह

चिकित्सक ने बढ़ते कोरोना मामलो पर गंभीर चिंता जताते हुए आमजन को चेताया 

आजमगढ़ : हम लोग कोविड-19 के सबसे खतरनाक दौर में पहुंच गए हैं। लेकिन सबसे ज्यादा आश्चर्य और दुख की बात यह है कि लोग इसको गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। शिशु व बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. डी.डी. सिंह ने अनौपचारिक बातचीत में बताया कि जिस समय सरकार के द्वारा लॉकडाउन किया गया था, उस समय इंफेक्शन का खतरा बहुत कम था क्योंकि केस बहुत कम थे। उसके बाद भी हम दुकान के दो गज दूरी हेतु गोलाई बनाकर उसमे ग्राहकों को खड़ा कराते थे। क्या इसलिए कि जिला प्रशासन का पहरा था? भाईयो अब क्योंकि मामले बहुत बढ़ गए हैं, इसलिए इंफेक्शन का खतरा बहुत अधिक बढ़ गया है। हम स्टेज 3 में प्रवेश कर चुके हैं या करने वाले हैं। लेकिन जनता का व्यवहार इससे उल्टा ही है। लोग बिना किसी जरूरी काम के घर से खूब निकल रहे हैं, मास्क बहुत कम लोग लगा रहे हैं और दूरी का पालन भी नहीं कर रहे हैं। प्रशासन की तरफ से भी अब कोई सख्ती दिखाई नहीं पड़ रही है, केवल थोड़े से चालान काट कर औपचारिकता निभाई जा रही है। स्वयंसेवी संस्थाएं और एनजीओ भी शांत हो गए हैं। मीडिया भी लोगों को जागरूक करने की जिम्मेदारी नहीं निभा रही है, वे भी अब समाचार देने तक ही सहयोग दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी हमारा सारा ध्यान चाइनीज सामान के बहिष्कार, बाबा रामदेव की दवा के ऊपर बहस, कानपुर के पुलिस व विकास के मामले पर ही केंद्रित हो गया है और हम कोरोना के बचाव से संबंधित बुनियादी सिद्धांतों को ही भूल गए हैं। यह इस प्रकार है कि जब दुश्मन के आने का अंदेशा था तो हम सब बंदूके लिए तैनात थे और अब जब दुश्मन सर पर आ गया है तो हम बंदूकें कोने में रख कर लापरवाही से इधर उधर टहल रहे हैं। यह बहुत दुखद स्थिति है और हमें इसके बहुत भयावह परिणाम झेलने पड़ेंगे। कहा गया है कि "प्रिवेंशन इज बेटर दैन क्योर" इसलिए हमे कोरोना से बचाव के उपाय के संग कोरोना आपदा मे चलते रहना होगा।

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रिपोर्ट आज़मगढ़ लाइव

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