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गन्ना सर्वेक्षण में मिली भारी अनियामितता,तत्कालीन पर्यवेक्षक के विरुद्ध दण्डात्मक कार्यवाही होगी

सर्वेक्षण में गन्ना माफियाओं से सांठ गांठ कर उन्हें भारी आर्थिक लाभ पहुंचाया गया

कृषक हित से जुड़े किसी भी कार्य में लापरवाही और अनियमिता किसी भी दशा में क्षम्य नहीं: मण्डलायुक्त

आज़मगढ़ 1 जून -- मण्डलायुक्त कनक त्रिपाठी के निर्देश पर गन्ना सर्वेक्षण के कार्यों की हुई जाॅंच में तत्कालीन गन्ना पर्यवेक्षक द्वारा गन्ना माफियाओं से सांठ गांठ कर उन्हें अनुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से सर्वेक्षण में हेराफेरी किये जाने का मामला उजागर हुआ है। मण्डलीय जाॅंच समिति द्वारा की गयी जाॅंच में जहाॅं कई कृषकों के सर्वेक्षण में अंकित प्लाट मौके पर मिले ही नहीं वहीं जो प्लाट मिले उनका गन्ना क्षेत्रफल काफी बढ़ा कर अंकित किया जाना पाया गया, जिससे स्पष्ट हुआ कि तत्कालीन गन्ना पर्यवेक्षक/सर्किल इंचार्ज द्वारा अपने दायित्वों का निर्वहन सही ढंग से नहीं किया गया तथा गन्ना माफियाओं से सांठगांठ कर उन्हें भारी आर्थिक लाभ पहुंचाया गया। मण्डलायुक्त श्रीमती त्रिपाठी ने मण्डल स्तर पर गठित जाॅंच समिति द्वारा प्रस्तुत जाॅंच आख्या एवं संस्तुति के आधार पर तत्कालीन गन्ना पर्यवेक्षक सुभाष यादव के विरुद्ध दण्डात्मक कार्यवाही हेतु प्रबन्ध निदेशक, उत्तर प्रदेश सरकारी चीनी मिल्स संघ लिमिटेड को संस्तुति प्रेषित कर दी है। प्राप्त विवरण के अनुसार मण्डलायुक्त के समक्ष जनपद के सदर तहसील अन्तर्गत ग्राम भगवानपुर निवासी सीताराम यादव ने इस आशय का प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया था कि गन्ना पर्यवेक्षक सुभाष यादव द्वारा कतिपय गन्ना माफियाओं को आर्थिक लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से गन्ना सर्वेक्षण कार्य में भारी अनियमितता की गयी है जिससे वास्तविक गन्ना किसानों को क्षति उठानी पड़ी है। मामला कृषक हित से सम्बन्धित पाये जाने पर पर मण्डलायुक्त ने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जाॅंच हेतु मण्डलस्रीय अधिकारियों की चार सदस्यीय समिति का गठन किया, जिसमें अपर आयुक्त (प्रशासन) अनिल कुमार मिश्र को अध्यक्ष तथा उप निदेशक राष्ट्रीय बचत डा. विजयनाथ मिश्र, संयुक्त कृषि निदेशक एसके सिंह एवं जिला गन्ना अधिकारी अशर्फी लाल को सदस्य के रूप नामित किया।
जाॅंच समिति द्वारा मामले की काफी बारीकी से जाॅंच पड़ताल करने के उपरान्त उपलब्ध कराई गयी संयुक्त आख्या में उल्लिखित किया है कि शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराये गये कृषक कोड के आधार पर देवारा कदीम में की गयी स्थलीय जाॅंच में अजय यादव पुत्र राजेन्द्र का अंकित कुल गन्ना रकबा 2.538 हेक्टेअर में से 1.876 हेक्टेअर पाया गया, अरुण कुमार पुत्र सूयनार्थ का अंकित गन्ना क्षेत्रफल 2.980 हेक्टेअर में से 2.180 हेक्टेअर, राजेन्द्र कुमार पुत्र जोखन का गन्ना रकबा 3.077 है जबकि इनके पास कृषि योग्य भूमि 2.538 हेक्टेअर पाई गयी। इसी प्रकार सुखारी पुत्र राजदेव का अंकित गन्ना क्षेत्रफल 1.007 हेक्टेअर के स्थान पर 0.958 हेक्टेअर, महेन्द्र यादव पुत्र जोखन का गन्ना रकबा 1.306 के स्थान पर 0.991 हेक्टेअर, लीला देवी पत्नी राजेन्द्र का गन्ना रकबा 1.967 के स्थान पर 1.579 हेक्टेअर, मनोज कुमार पुत्र राजेन्द्र के गन्ना क्षेत्र 3.255 के स्थान पर 0.676 हेक्टेअर तथा अमित पुत्र सूर्चनाथ के अंकित गन्ना रकबा 1.060 के स्थान पर 0.847 हेक्टेअर गन्ना क्षेत्रफल पाया गया। इसी प्रकार ग्राम नौबरार देवारा किता-1 में भी किये गये स्थलीय निरीक्षण में दिनेश पुत्र राघव के अंकित गन्ना रकबा 3.395 हेक्टेअर के स्थान पर 0.632 हेक्टेअर, राघव पुत्र छोटकुन के गन्ना रकबा 3.267 के स्थान पर 0.978 हेक्टेअर तथा अर्चना यादव पत्नी दिनेश यादव के गन्ना क्षेत्रफल 3.044 के स्थान पर 0.656 हेक्टेअर गन्ना क्षेत्रफल पाया गया। जाॅंच समिति ने यह भी अवगत कराया है कि इन कृषकों के ग्राम देवारा कदीम में कुल 18 प्लाट एवं नौबरार देवारा किता-1 में 28 प्लाट स्थलीय सत्यापन के दौरान मौके पर मिले ही नहीं, जिनके बारे में सम्बन्धित किसानों द्वारा बाढ़ के कारण समाप्त हो जाना बताया गया, जबकि ये सभी प्लाट कम्प्यूटर में गन्ना क्षेत्रफल के रूप में दर्ज हैं।
मण्डलायुक्त कनक त्रिपाठी ने जाॅंच समिति द्वारा प्रस्तुत आख्या में तत्कालीन गन्ना पर्यवेक्षक सुभाष यादव द्वारा भारी अनियमिता करते हुए गन्ना माफियाओं से मिलीभगत कर उन्हें भारी आर्थिक लाभ पहुंचाये जाने का दोषी मानते हुए उनके विरुद्ध दण्डात्मक कार्यवाही की संस्तुति की है। उन्होंने स्पष्ट कि कृषक हित से जुड़े किसी भी कार्य में लापरवाही और अनियमिता करने वाले किसी भी अधिकारी एवं कर्मचारी को किसी भी दशा में नहीं जायेगा।

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रिपोर्ट आज़मगढ़ लाइव

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