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राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की दीदीयों को डीएम ने जागरूकता कार्यशाला में प्रशिक्षित किया


प्रवासी कर्मियों के हुनर एवं अनुभव के आधार पर इनके परिवार की महिला सदस्य को समूह से जोड़ें -डीएम

महामारी से निपटने तथा रोजगार के अवसर सृजन करने में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन प्रयत्नशील है

आजमगढ़ 11 मई- पोस्ट इफेक्ट ऑफ़ कोविड-19 के अन्तर्गत राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन आजमगढ़ की दीदीयों को जिलाधिकारी नागेन्द्र प्रसाद सिंह द्वारा नेहरू हाल के सभागार में एक दिवसीय जागरूकता कार्यशाला के अन्तर्गत प्रशिक्षित किया गया। इस अवसर पर जिलाधिकारी ने कहा कि अभी तक बाहर से आये 19782 प्रवासियों को समूह के माध्यम जोड़े जाने की प्रक्रिया जारी है, जिसमें 252 महिला सदस्यों को समूह से जोड़ा जा चुका है। सर्वे का कार्य प्रारम्भ है तथा इन प्रवासी रोजगार कर्मियों के हुनर एवं अनुभव के आधार पर इनके परिवार की महिला सदस्य को समूह से जोड़ते हुए रोजगारोन्मुखी करते हुए आजीविका से जोड़ना है।
जिलाधिकारी ने दीदीयों को बताया कि जो प्रवासी मजदूर बाहर से आ रहे हैं, उनको तहसील क्षेत्र के शेल्टर होम में 02 दिन रखकर तीसरे दिन उनको होम क्वारंटाइन किया जा रहा है। कुछ प्रवासी मजदूर अपने साधनों से भी आ रहे हैं, यदि ऐसा कोई व्यक्ति आता है तो दीदीयाॅ इसकी सूचना जल्द से जल्द उपलब्ध करायें। होम क्वारंटाइन हुए व्यक्तियों के निगरानी के लिए प्रत्येक ग्राम में ग्राम निगरानी समिति भी बनायी गयी है।
जिलाधिकारी ने डीसी एनआरएलएम, डीडीएम, बीबीएम को निर्देश दिये कि जिन-जिन प्रवासी मजदूरों का होम क्वारंटाइन अवधि पूर्ण हो गया है, उनको भी मनरेगा के अन्तर्गत जाबकार्ड देकर मनरेगा से जोडे़ं। उन प्रवासी मजदूरों में यह भी सुनिश्चित करें कि जो प्रवासी मजदूर अन्त्योदय कार्डधारक नही है, न ही मनरेगा और न ही श्रम विभाग में पंजीकृत है, न ही किसी पेंशन का लाभ मिल रहा है, ऐसे प्रवासी मजदूरों को मुख्यमंत्री की दिहाड़ी योजना के अन्तर्गत 1000 रू0 की सहायता धनराशि उपलब्ध करायें।
जिलाधिकारी ने डीडीएम, बीबीएम को निर्देश दिये कि दीदीयों के समूह को प्रोड्यूजर ग्रुप से जोड़ें और दीदीयों को प्रशिक्षित करें और बैंकों में क्रेडिट लिंकेज करायें। उन्होने दीदीयों से कहा कि अचार, मुरब्बा, पापड़, अन्य उत्पाद को बनायें और उसमें गुणवत्ता का ध्यान रखें।
मुख्य विकास अधिकारी आनन्द कुमार शुक्ला ने बताया कि कोरोना वायरस रोग (कोविड-19) एक संक्रामक रोग है, जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा कोरोना वायरस के प्रकोप को महामारी घोषित किया गया है। यह वायरस आगामी दिनों में देश की अर्थव्यवस्था पर कहर ढा सकता है जिसका सबसे ज्यादा असर रोजगार के मोर्चे पर दिखने की आशंका जतायी जा रही है। इस महामारी से निपटने तथा रोजगार के अवसर सृजन करने में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन प्रयत्नशील है।
सीडीओ ने कहा कि जनपद में अचार-मुरब्बा, जेली-जैम आदि में प्रशिक्षित या प्रशिक्षण के लिए इच्छुक सदस्यों को प्रशिक्षण कराये जाने का प्रस्ताव है, जिसमें अब तक 170 समूह के 470 सदस्यों की सूची प्रशिक्षण के लिए प्राप्त है। कोविड-19 के बचाव में मास्क का उपयोग प्रत्येक दशा में किया जाना है। इस सन्दर्भ में 210 समूह के 372 दीदीयों द्वारा 87000 मास्क तैयार कर बिक्री कराया जा चुका है। विभिन्न प्रकार के रोजगारोन्मुखी क्रियाकलापों के लिए मिशन द्वारा कुल 7325 समूह के गठन तथा 4930 आर0एफ0 एवं 2935 सी0आई0एफ0 तथा 2100 सी0सी0एल0 का लक्ष्य रखा गया है। उन्होने बताया कि जनपद में कुल 825 कैडर कार्यरत हैं जिसमें समूह सखी 325, बीआरपी 68, आई0सी0आर0पी0 269, आई0पी0आर0पी0 22, बैंक सखी 26, पशु सखी 49, कृषि सखी 52 तथा अन्य कैडर हैं।
इस अवसर पर दीदीयों के संघर्ष पर आधारित डाक्युमेन्ट्री फिल्म ‘‘गुड़िया’’ को एलईडी के माध्यम से दिखाया गया। इस डाक्युमेन्ट्री फिल्म के स्क्रीप्ट राईटर जिलाधिकारी हैं। इस डाक्युमेन्ट्री फिल्म में गुड़िया की भूमिका आकांक्षा सिंह द्वारा की गयी है। जिलाधिकारी ने इसके लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की तरफ से उपहार दिया गया।
इस अवसर पर डीसी एनआरएलएम बीके मोहन, डीएम गुलाब सरोज, डीएमएम, बीएमएम, संबंधित खण्ड विकास अधिकारी, एडीओ (पं0) सहित एनआरएलएम की दीदीयाॅ उपस्थित रहे।

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रिपोर्ट आज़मगढ़ लाइव

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