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मण्डलायुक्त ने बलिया में नियम विरुद्ध तरीके से जारी 9 अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र निरस्त किया

डीएम आज़मगढ़ की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति के फैसले को रखा बरकरार

आज़मगढ़ 20 फरवरी -- मण्डलायुक्त कनक त्रिपाठी की अध्यक्षता में गठित मण्डलीय अपीलीय फोरम ने जनपद बलिया में गोंड जाति के 9 लोगों को नियम विरुद्ध ढंग से निर्गत अनुसूचित जनजाति के प्रमाण पत्रों को निरस्त करते उसे जब्त किये जाने का आदेश पारित किया है। इसके साथ ही मण्डलीय अपीलीय फोरम ने इस बात की भी संस्तुति की है कि अनियमित तरीके से निर्गत किये प्रमाण पत्रों के आधार पर यदि लाभार्थियों द्वारा नियुक्ति प्राप्त कर ली गयी हो तो आदेश की प्रति सम्बन्धित विभाग को भी नियुक्ति निरस्त किये जाने हेतु उपलब्ध कराई जाय। इसके साथ ही अनियमित तरीके से अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र निर्गत करने वाले तहसीलदार एवं अन्य सम्बन्धित कर्मचारियों के विरुद्ध तत्काल अनुशासनिक कार्यवाही संस्थित किये जाने की भी संस्तुति की गयी है। इसी प्रकार जनपद आज़मगढ़ में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति द्वारा गोंड जाति की एक सदस्य को अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र निर्गत नहीं किये जाने के फैसले को तथ्यों एवं साक्ष्यों पर आधारित सही निर्णय मानते हुए मण्डलीय अपीलीय फोरम ने उक्त निर्णय को बरकरार रखा है। ज्ञातव्य हो कि जनपद बलिया में बाॅंसडीह निवासी लल्लन प्रसाद पुत्र राम कृपाल, लक्ष्मण प्रसाद, पवन कुमार, संजय कुमार, अजय कुमार, राजेश कुमार व मनीष कुमार पुत्रगण लल्लन प्रसाद, कुमारी चन्द्र पुत्री लल्लन प्रसाद एवं प्रेमलता पत्नी पवन कुमार द्वारा कुटरचित अभिलेखों के आधार पर तथ्यों को छिपा कर, फर्जी दस्तावेज के सहारे गोंड जाति अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र प्राप्त कर लिया गया था, जबकि वास्तविक रूप से ये लोग पिछड़ी जाति के भड़भूजा हैं। इस प्रकार जिला स्तरीय जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति बलिया द्वारा 8 जुलाई 2019 को पारित आदेश के विरुद्ध बाॅंसडीह निवासी जयप्रकाश मौर्य द्वारा मण्डलीय अपीलीय फोरम के समक्ष अपील प्रस्तुत की गयी। सूच्य है कि मण्डलीय अपीलीय फोरम में मण्डलायुक्त कनक त्रिपाठी अध्यक्ष, मुख्य राजस्व अधिकारी बलिया प्रवरशील बरनवाल सदस्य, उप निदेशक पंचायत राज जियावन सदस्य अनुसूचित जाति एवं उप निदेशक समाज कल्याण सुरेश चन्द सदस्य सचिव हैं। अपीलकर्ता श्री मौर्य द्वारा कहा गया कि उक्त लल्लन प्रसाद पुत्र राम कृपाल, लक्ष्मण प्रसाद, पवन कुमार, संजय कुमार, अजय कुमार, राजेश कुमार व मनीष कुमार पुत्रगण लल्लन प्रसाद, कुमारी चन्द्र पुत्री लल्लन प्रसाद एवं प्रेमलता पत्नी पवन कुमार कूटरचना कर फर्जी दस्तावेज के आधार पर अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र निर्गत कराकर सरकारी नौकरी प्राप्त कर ली है तथा शासकीय धन का दुरुपयोग कर रहे हैं। अपील में उल्लिखित किया गया कि इस सम्बन्ध में पूर्व में उमाशंकर सिंह के प्रार्थना पत्र पर जिला स्तरीय स्क्रूटनी कमेटी द्वारा तहसीलदार बाॅसडीह से आख्या मांगी गयी थी जिसमें तहसीलदार द्वारा स्पष्ट रूप से कहा गया कि लल्लन प्रसाद और उनके परिवार द्वारा पिछड़ी जाति (भड़भूजा/कहार) की जगह कूटरचना कर तथ्यों को छिपाते हुए गोंड अनुसूचित जाति/जनजाति का प्रमाण पत्र प्राप्त कर लिया गया है। इसकेे अलावा तहसीलदार बाॅंसडीह ने अपनी आख्या में उल्लेख किया है कि लल्लन प्रसाद के निवास स्थल, नगर पंचायत अध्यक्ष व आसपास के लोगों से पूछताछ व स्थलीय निरीक्षण में भी उक्त पूरे परिवार को पिछड़ी जाति का होना पाया गया।
मण्डलीय अपीलीय फोरम ने मामले के सम्बन्ध में उपलब्ध साक्ष्यों और दस्तावेजों का परीक्षण किया तो पाया कि उपजिलाधिकारी बाॅसडीह के न्यायालय में धारा 123 जमींदारी उन्मूलन अधिनियम के एक मामले में भी लल्लन प्रसाद को अनुसूचित जाति का नहीं माना गया था जिसके कारण उनका वाद निरस्त हो गया था। इसके अलावा उनके पिता द्वारा तहरीर विक्रय विलेख में स्वयं को अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति का नहीं होना स्वयं स्वीकार किया गया है। इसी प्रकार लल्लन प्रसाद द्वारा बाॅसडीह इण्टर कालेज से निर्गत अपनी टीसी की प्रति उपलब्ध कराई गयी जिसमें उन्हें गोंड लिखा गया है। इसके अलावा वर्ष 1965 में हाई स्कूल के परीक्षार्थी तालिका, मूल रिकार्ड के अवलोकन में भी उनकी जाति स्पष्ट रूप से पिछड़ी जाति अंकित है।
इस प्रकार मण्डलीय अपीलीय फोरम ने तहसीलदार बाॅंसडीह की आख्या, उपलब्ध दस्तावेजों के साक्ष्य सबूतों एवं समय समय पर निर्गत शासनादेशों, भारत सरकार के अध्यादेशों आदि के परिप्रेक्ष्य में अपीलकर्ता जयप्रकाश मौर्य द्वारा प्रस्तुत अपील स्वीकार करते हुए जिला स्तरीय स्क्रूटनी कमेटी बलिया द्वारा दिनांक 8 जुलाई 2019 को पारित आदेश को निरस्त कर दिया है। इसके साथ ही अपीलीय फोरम ने तहसीलदार बाॅंसडीह द्वारा 31 जुलाई 2003 को लल्लन प्रसाद पुत्र राम कृपाल व लक्ष्मण प्रसाद पुत्र लल्लन, पवन कुमार, कुमारी चन्दा पुत्री लल्लन प्रसाद व प्रेमलता को जारी अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र संख्या 810, 808, 809, 806, व 807 तथा 30 जुलाई 2003 को संजय कुमार, अजय कुमार, राजेश कुमार, मनीष कुमार पुत्रगण लल्लन प्रसाद को निर्गत अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति का निर्गत प्रमाण पत्र संख्या 801, 802, 800, 803 को निरस्त करते हुए उसे जब्त किये जाने का आदेश पारित किया है। इसके साथ ही मण्डलीय अपीलीय फोरम ने इस बात की भी संस्तुति की है कि अनियमित तरीके से निर्गत किये प्रमाण पत्रों के आधार पर निर्गत किये गये प्रमाण पत्र के आधार पर यदि लाभार्थियों द्वारा नियुक्ति प्राप्त कर ली गयी हो तो आदेश की प्रति सम्बन्धित विभाग को भी नियुक्ति निरस्त किये जाने हेतु उपलब्ध कराई जाय। इसके साथ ही अनियमित तरीके से अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र निर्गत करने वाले तहसीलदार एवं अन्य सम्बन्धित कर्मचारियेां के विरुद्ध तत्काल अनुशासनिक कार्यवाही संस्थित किये जाने की भी संस्तुति की गयी है।
इसी प्रकार मण्डलीय अपीलीय फोरम के समक्ष आज़मगढ़ नगर के मुहल्ला अनन्तपुरा निवासी कुमारी हर्षिता रानी गोंड पुत्री सत्येन्द्र कुमार गोंड ने जिला स्तरीय जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति ने 10 जून 2019 को पारित आदेश से असन्तुष्ट होकर इस आशय की अपील प्रस्तुत किया कि गोंड जाति के व्यक्तियों के पक्ष में अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र निर्गत नहीं किये जा रहे हैं। मण्डलीय अपीलीय फोरम ने जिला स्तरीय समिति एवं अपीलकर्ता द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज का परीक्षण के उपरान्त पाया कि गोंड जाति अनुसूचित जाति/जनजाति के अन्तर्गत नहीं आती हैं, बल्कि यह पिछड़ी जाति के अन्तर्गत आते है तथा जिला स्तरीय समिति का पारित आदेश तथ्यों पर आधारित है तथा सही है। मण्डलयी फोरम ने इस सम्बन्ध में जिलाधिकारी आज़मगढ़ की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति द्वारा 10 जून 2019 को पारित आदेश को त्रुटिरहित पाते हुए उक्त आदेश को बरकरार रखा है।

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रिपोर्ट आज़मगढ़ लाइव

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