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नागरिकता संशोधन बिल को संविधान विरोधी बता राष्ट्रीय ओलमा कौन्सिल ने किया मौन प्रदर्शन

ये शर्मनाक है कि दुनिया को ‘‘वसुदेव कुटुम्बकम‘‘ का मंत्र देने वाला देश अब धर्म के नाम पर नागरिकता देगा

यह काला कानून संविधान की मूल भावना और गाँधी जी के सिद्धांतों के खिलाफ है - तलहा रशादी, प्रवक्ता   

आजमगढः कल देर रात लोकसभा में पारित नागरिकता संशोधन बिल का विरोध करते हुए राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल के कार्यकर्ताओं ने आज राइडर स्थित गांधी प्रतिमा के सामने सांकेतिक विरोध जताते हुए मुहं पर काली पट्टी बांध मौन प्रदर्शन किया तथा बिल के विरोध में केन्द्र सरकार को घेरा। इस अवसर पर राष्ट्रीय ओलमा कौन्सिल के कार्यकर्ता हाथों में तख्तियां लिये हुए थे जिसमें भारत के संविधान की प्रस्तावना, मौलिक अधिकारां का वर्णन, नागरिकता संशोधन बिल के विरोध के नारे, गांधी हम शर्मिंदा हैं आदि नारे लिखे हुए थे। प्रदर्शन में शामिल पार्टी प्रवक्ता तलहा रशादी ने कहाकि, आज का दिन देश के इतिहास में काला दिन है कि भाजपा सरकार द्वारा लोकसभा में संख्या के बल पर सारे विरोध और संशोधन को अनसुना करते हुए 12 बजे रात में ये काला कानून पास किया गया जबकि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत और उसका संविधान दोनो ही धर्मनिर्पेक्ष है और धर्मनिर्पेक्षता, समता, समाजवाद ही इसकी मूलभावना और प्रस्तावना है। यह काला कानून संविधान की मूलभावना के खिलाफ है और आज इस कानून का लोकसभा से पास होना राष्ट्रपिता महात्मा गांधीजी के सिध्दान्तों की हत्या है इसलिए आज हम उनकी प्रतिमा के सामने खड़े होकर इस बिल के विरोध में ‘‘सत्याग्रह ंआंदोलन‘‘ करने का प्रण लेते हैं। ये शर्मनाक है कि दुनिया को ‘‘वसुदेव कुटुम्बकम‘‘ नारा देने वाला भारत अब धर्म के नाम पर नागरिकता देगा। ये बिल संविधान के अनुच्छेद 14 को खुलेआम उल्लंघन है।
पार्टी के यूथ विंग के अध्यक्ष नुरूलहोदा अन्सारी ने कहाकि देश की आज़ादी में हिन्दु मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी ने मिलकर देश के लिए बलिदान दिया था और एक सम्पूर्ण, प्रभुत्व संपन्न गणराज्य की स्थापना की थी जिसमे सभी धर्म के मानने वालो को समान अधिकार और अवसर दिया गया था परन्तु इस बिल से मुसलमानों को अलग रखकर देश में सम्प्रदायिक्ता को बढ़ावा देने के साज़िश रची गई है। राष्ट्रीय ओलमा कौन्सिल इस कतई बर्दाशत नही करेगी और हम इसके विरूध्द कानूनी संघर्ष जारी रखेंगे और सभी विपक्षी दलों से निवेदन करते हैं कि वो राष्ट्रहित में राज्यसभा मे इस बिल का विरोध करें। धरने को नेतृत्व कर रहे जिलाध्यक्ष शकील अहमद ने कहाकि भारत हमारा देश है और हम यही पैदा हुए हैं और यही मरेंगे और इसकी खूबसूरती इसकी अनेकता में एकता में ही हैं और ये बिल देश की एकता और साम्प्रदायिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाने वाला है। इसकी जितनी भी निंदा की जाए ये कम है, भाजपा सरकार को इस बिल को वापस लेना चाहिए और देश के बुनियादी मुद्दे जैसे की रोजगार, अर्थव्यवस्था, किसान आदि पे ध्यान देना चाहिए।
इस अवसर पर शहबाज़ अहमद, आमिर, मोनू, आजम, शाहिद, मणिराम, सुनील सिंह, अशफाक, आरिफ, अबसार आदि मौजूद रहे।

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रिपोर्ट आज़मगढ़ लाइव

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