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आजमगढ़ : पराली जलाने की घटना होने पर संबंधित लेखपाल जिम्मेदार होंगे - जिलाधिकारी

पराली/कृषि अपशिष्टों के जलाने से रोकने को प्रत्येक तहसील स्तर पर उड़न दस्ता टीम गठित किया गया

आजमगढ़ 22 अक्टूबर -- जिलाधिकारी नागेन्द्र प्रसाद सिंह ने बताया है कि पराली/कृषि अपशिष्टों को जलाने से रोकने के लिए सेल का गठन किया गया है। उन्होने बताया कि गठित सेल द्वारा प्रत्येक ग्राम के ग्राम प्रधान एवं क्षेत्रीय लेखपाल को यह निर्देशित किया गया है कि किसी भी दशा में पराली/कृषि अपशिष्टों को जलाये जाने की घटना पाये जाने पर संबंधित व्यक्ति से क्षतिपूर्ति की वसूली एवं पुनरावृत्ति होने पर दोषी व्यक्ति के विरूद्ध अर्थदण्ड लगाये जाने के संबंध में कार्यवाही सुनिश्चित की जाय। पराली जलाने की घटना प्रकाश में आने पर संबंधित लेखपाल जिम्मेदार होंगे। 
इसी के साथ ही उन्होने बताया कि गठित सेल का दायित्व होगा कि धान कटने के समय रबी में गेहुं की बुआई तक प्रतिदिन फसल अवशेष जलाने की घटनाओं एवं उसकी रोकथाम के लिए की गयी कार्यवाही की समीक्षा करते हुए प्रत्येक कार्यदिवस में  उक्त रिपोर्ट उ0प्र0 प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा गठित समिति के समक्ष तथा प्रमुख सचिव पर्यावरण विभाग एवं प्रमुख सचिव कृषि विभाग, उ0प्र0 शासन को प्रस्तुत की जायेगी।
इसी के साथ ही जिलाधिकारी ने बताया कि प्रत्येक तहसील स्तर पर पराली (धान का पुआल/अन्य कृषि अपशिष्टों) के जलाये जाने के कारण प्रदूषण को नियंत्रित करने हेतु प्रत्येक तहसील स्तर पर उड़न दस्ता टीम गठित किया गया है।
उन्होने बताया कि उड़न दस्ता टीमों को यह निर्देश दिये गये हैं कि किसी भी स्थिति में धान, पराली एवं अन्य कृषि अपशिष्ट न जलाये जायें, इस हेतु प्रत्येक तहसील पर एवं विकास खण्ड के समस्त लेखपाल एवं ग्राम प्रधानों को सम्मिलित करते हुए एक व्हाट्सअप गु्रप बनाया जाय, ताकि उस क्षेत्र में कहीं भी फसल अवशेष जलाने की घटना होती है तो संबंधित ग्राम प्रधान व लेखपाल व्हाट्सअप ग्रुप एवं दूरभाष के माध्यम से संबंधित तहसील स्तर पर गठित उड़न दस्ता टीम को इसकी तत्काल सूचना देंगे।
जिलाधिकारी ने बताया कि 02 एकड़ कम क्षेत्रफल वाले कृषकों से 2500 रू0, 2-5 एकड़ वाले कृषकों से रू0 5000 एवं 5 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल वाले कृषकांे से 15000 रू0 की क्षतिपूर्ति फसल अवशेष जलाने वाले व्यक्ति से वसूली की जायेगी। उन्होने बताया कि तहसील स्तर पर गठित उड़न दस्ता टीमों का दायित्व होगा कि धान कटने के समय से लेकर रबी में गेहुं की बुआई तक प्रतिदिन फसल अवशेष जलाने की घटनाओं एवं इसके रोकथाम के लिए की गयी कार्यवाही की सतत् निगरानी एवं अनुसरण करते हुए प्रत्येक कार्यदिवस की सूचना अनिवार्य रूप से निर्धारित प्रारूप पर जनपद स्तर पर गठित सेल को देंगे।
जिलाधिकारी द्वारा प्रत्येक ग्राम के ग्राम प्रधान एवं क्षेत्रीय लेखपाल को निर्देशित किया गया है कि किसी भी दशा में अपने क्षेत्र से संबंधित क्षेत्र में पराली एवं अन्य कृषि अपशिष्ट न जलाने दिया जाय। कृषि अवशेष जलाने की घटना प्रकाश में आने पर संबंधित लेखपाल जिम्मेदार होंगे तथा जन जागरण अभियान के माध्यम से फसल अवशेष न जलाये जाने एवं फसल अवशेष जलाने से होने वाले दुष्परिणामों से सचेत करते हुए कृषकों को प्रेरित करेंगे।

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रिपोर्ट आज़मगढ़ लाइव

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