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आजमगढ़ : नवरात्र व दशहरा पर्व हेतु डीएम ने ईओ नगर पालिका/नगर पंचायतों को सख्त निर्देश दिये

स्थानिय निकायों में मार्ग, प्रकाश, पेयजल, सफाई आदि की व्यवस्था कराया जाना परम आवश्यक है- डीएम 

मूर्ति विसर्जन के संबंध में पौराणिक ग्रंथो में वर्णित प्रक्रिया और पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की गाइडलाइन्स का पालन हो 

आजमगढ़ 27 सितम्बर-- जिलाधिकारी नागेन्द्र प्रसाद सिंह ने बताया है कि दिनांक 29 सितम्बर 2019 से नवरात्र का महापर्व प्रारम्भ होकर दिनांक 08 अक्टूबर 2019 को विजयादशमी का पर्व मनाया जायेगा। इस अवसर पर त्यौहारों को सकुशल सम्पन्न कराये जाने हेतु जिलाधिकारी ने ईओ नगर पालिका/नगर पंचायतों को निर्देश दिये कि जनपद के स्थानीय निकायों में मार्ग, प्रकाश, पेयजल, सफाई आदि की व्यवस्था कराया जाना परम आवश्यक है, जिससे नागरिकों को कोई असुविधा उत्पन्न न होने पाये।
जिलाधिकारी ने कहा है कि दशहरे के त्यौहार को दृष्टिगत रखते हुए समस्त अधिशासी अधिकारी नगर पालिका/नगर पंचायतें अपने-अपने निकायों में मूर्ति स्थापित किये जाने वाले पण्डालों/रामलीला आयोजन स्थलों पर सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त मात्रा में सफाई कर्मियों की शिफ्टवार ड्यूटी लगाया जाना, सार्वजनिक जगहों पर जहां-जहां दर्शनार्थियों की भीड़ इकट्ठी होती हो, पर्याप्त मात्रा में साफ-सफाई व सुरक्षित पानी के टैंकरों , रात्रि में प्रकाश की पर्याप्त व्यवस्था कराते हुए त्यौहारों को सकुशल सम्पन्न कराया जाना परम आवश्यक है, जिससे नागरिकों को कोई असुविधा न हो।
जिलाधिकारी ने उक्त त्यौहारों के दृष्टिगत समस्त अधिशासी अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने स्टाफ के साथ त्यौहारों की समाप्ति तक अपने-अपने निकायों में उपस्थित रहकर सकुशल त्यौहार उपरोक्तानुसार कार्यवाही करते हुए सम्पन्न कराया जाना सुनिश्चित करेंगे। किसी भी दशा में जिलाधिकारी से बिना पूर्व अनुमति प्राप्त किये मुख्यालय नही छोड़ेंगे।
उन्होने बताया है कि मूर्ति विसर्जन के संबंध में पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली एवं केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नई दिल्ली द्वारा गाईडलाइन्स निर्गत किये गये हैं कि पौराणिक ग्रन्थों में वर्णित विधियों के अनुसार प्राकृतिक पदार्थाें जैसे मिट्टी से बनी मूर्तियों की ही पूजा किया जाय। मूर्ति निर्माण हेतु प्लास्टर आॅफ पेरिस तथा पूजा हेतु पकाई गयी मिट्टी की मूर्ति इत्यादि का प्रयोग कदापि न किया जाय।
मूर्तियों की पेंटिंग को हतोत्साहित किया जाय और यदि पेंटिंग किया जाता है तो इस कार्य हेतु जल में घुलनशील रंगों का प्रयोग किया जाय, जो विषैले न हों। विषैले एवं जैविक प्रक्रिया से अविघटनकारी रासायनिक रंगों का प्रयोग कड़ाई से प्रतिबंधित किया जाय।
मूर्ति विसर्जन से पूर्व पूजा की सामग्रियों जैसे फूल, वस्त्र (कपड़ा), सजावट के सामान (कागज एवं प्लास्टिक) इत्यादि को हटा दिया जाय। इन सामग्रियों में से जैविक तथा अजैविक प्रक्रिया से विघटनकारी तथा अविघटनकारी पदार्थाें को अलग-अलग कर लिया जाय। कपड़ों को अनाथालयों में प्रयोग हेतु दिया जा सकता है। मूर्ति विसर्जन से होने वाले कुप्रभावों के बारे में जन-जागरूकता अभियान द्वारा जनता को अवगत किया जाय।
मूर्ति विसर्जन स्थल की बैरिकेटिंग करा दिया जाय। मूर्ति विसर्जन से पूर्व सतह पर सिंथेटिक लाइनर बिछा दिया जाय। मूर्ति विसर्जन के पश्चात लाइनर को समस्त अपशिष्टों सहित पानी से बाहर निकाल लिया जाय, जिससे कि लकड़ी वगैरह का पुनः प्रयोग किया जा सके तथा मिट्टी का प्रयोग गड्ढ़ों की भराई में किया जा सके।
स्थानीय निकायों/जिला प्रशासन द्वारा सामान्यतः मूर्ति विसर्जन हेतु पर्याप्त संख्या में विसर्जन स्थल चिन्हित किये जाते हैं, जिससे भीड़ को नियंत्रित करने में मदद मिले तथा मूर्ति विसर्जन से होने वाले जल प्रदूषण को कम किया जा सके। जनता की जानकारी हेतु ऐसे चिन्हित स्थलों को समाचार पत्रों में विसर्जन तिथि से लगभग एक माह पूर्व प्रकाशित कराया जाय तथा पूजा समितियों को भी मूर्ति विसर्जन स्थल के बारे में पूर्व में ही सूचित कर दिया जाये।
उपर्युक्त दिशा-निर्देश के सम्यक अनुपालन हेतु तहसील स्तर पर एक समिति का गठन किया गया है, जिसमें संबंधित उप जिलाधिकारी अध्यक्ष, क्षेत्राधिकारी (पुलिस) उपाध्यक्ष, तहसीलदार सदस्य, खण्ड विकास अधिकारी सदस्य, प्रभारी निरीक्षक/थानाध्यक्ष सदस्य, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका/नगर पंचायतें सदस्य, पूजा समिति संयोजक गण सदस्य, पर्यावरण/प्रदूषण नियंत्रण के क्षेत्र में कार्यरत गैर सरकारी संगठन सदस्य होंगे।
जिलाधिकारी ने कहा है कि प्रत्येक समिति एक सप्ताह के अन्दर मूर्ति पूजा आयोजकों/मूर्ति निर्माताओं की तहसीलवार/थानावार बैठकों का आयोजन करेंगी तथा उपरोक्त दिशा-निर्देशों के अनुपालन हेतु सभी संबंधित को प्रेरित करेंगे। मूर्ति विसर्जन किसी भी दशा में नदियों मंे नही किया जायेगा। जनपद की सभी निकायों से अधिशासी अधिकारी दशहरे के पूर्व अपने-अपने क्षेत्र में तालाबों/पोखरों का चयन कर नियमानुसार गड्ढ़ा खुदवाते हुए पानी एवं प्रकाश की व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए मूर्तियों के विसर्जन की कार्यवाही सम्पन्न करायेंगे, जिससे कोई कानून व्यवस्था/यातायात संबंधी कोई व्यवधान/प्रतिकूलता न हो। मूर्ति विसर्जन के बाद की साफ-सफाई की जिम्मेदारी नगरीय क्षेत्रों हेतु अधिशासी अधिकारी तथा ग्रामीण क्षेत्र हेतु खण्ड विकास अधिकारियों तथा ग्राम प्रधानों की होगी।
अतः उक्त निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन करते हुए सभी संबंधित को अवगत कराते हुए तद्नुसार कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी। इसमें किसी भी प्रकार की चूक क्षम्य न होगी।

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रिपोर्ट आज़मगढ़ लाइव

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