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जीवन के उत्थान में भाषा, संस्कृति एवं आचरण की बहुत बड़ी भूमिका होती है-डॉ सरिता बुधु

साहित्यिक एवं सामाजिक जगत के लोगों ने मारीशस की डॉ सरिता बुधु का जोरदार स्वागत किया 

आजमगढ़। लोक मनीषा परिषद के तत्वावधान में सोमवार को कटरा स्थित मदर कान्वेंट स्कूल के सभागार में मारीशस से चलकर वाराणसी और प्रयागराज कुंभ से होते हुये आजमगढ़ पहुंचने पर डॉ सरिता बुधु का साहित्यिक एवं सामाजिक जगत के लोगों द्वारा जोरदार स्वागत किया गया। प्रवासियों के जीवन पर एक समीक्षा स्कूल के प्रबंधक दीपक अग्रवाल की अध्यक्षता में गोष्ठी आयोजित हुई। सर्वप्रथम मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर गोष्ठी का शुभारम्भ किया गया।
गोष्ठी को सम्बोधित करते हुये डॉ सरिता बुधु ने कहाकि जीवन के उत्थान में भाषा, संस्कृति एवं आचरण की बहुत बड़ी भूमिका होती है। आज भी हम इसें नहीं छोड़े हैं और रिति रिवाज आज भी उसी प्रकार हैं। हमारे लोगों ने अंग्रेजों के समय में कठिन परिश्रम करके जिस धरती को उर्वर व सुहाना बनाया आज उसका करते हुये दुनिया को संदेश देने जाया करते है। श्री जगदीश बर्नवाल कुंद ने गिरमिटिया मजदूर बनकर जाने वाले पूर्वजों की जीवन दशाओं की झलक रखा। उनके वहां के शासन प्रशासन, व्यापार, शिक्षा, विज्ञान आदि की समृद्धि करते हुये विकसित व सुखी जीवन प्राप्त किया। लोग साहित्य दर्शन और राजनीति पर अनेक विचार सृजित करके संसार को दिशा देने में लगे है। श्री संत लाल तूफान ने भोजपूरी भाषा शक्ति और प्रयोग में लाने वाले प्रवासियों की प्रशंसा किये। विकास यादव वाराणसी ने श्रीमती डॉ सरिता बुधु के धार्मिक निष्ठा व बोली के प्रेरणाप्रद घटनाओं को सुनाया। परिषद के अध्यक्ष पंडित जन्मेजय पाठक ने कहाकि हमारे प्रवासीबंधु देश की मातृभूमि को अपना समझकर जो सम्मान दे रहे है वो हमारे लिए प्रेरणा संदेश है। समृद्धि के मार्ग पर अनवरत् परिश्रम करके बढ़ने के सूत्र को संकल्प लेकर बढ़ना उचित ठहराया। गोष्ठी में दीपक अग्रवाल ने उपस्थित छात्र-छात्राओ, अध्यापकों एवं वरिष्ठजनों को धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर राहुल सिंह, हीरालाल शर्मा, भवानी प्रसाद उपाध्याय, शिवजी पांडेय आदि प्रबुद्धजन मौजूद रहे।

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रिपोर्ट आज़मगढ़ लाइव

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