तकनीकी ज्ञान के बिना कृषि विकास की कल्पना भी नहीं की जा सकती - डा0 राजेन्द्र कुमार जायसवाल वर्तमान में किसान तकनीकी ज्ञान से ही नहीं बल्कि आर्थिक मोर्चे पर भी पिछड़ा है- डा0 राणा प्रताप सिंह कूबा:मेहनाजपुर: आजमगढ़ :: कूबा महाविद्यालय दरियापुर नेवादा में आई.सी.एस.एस.आर मानव संसाधन विभाग भारत सरकार द्वारा प्रायोजित ग्रामीण विकास में तकनीकी की भूमिका व संभावनाएॅं विषयक राष्टीय संगोष्ठी का दूसरा दिन कुलशलता पूर्वक सम्पन्न हुआ। राष्ट्रीय संगोष्ठी में सर्वप्रथम दीपप्रज्जवलित कर कार्यक्रम प्रारम्भ किया गया। तत्पश्चात् उपाचार्य डॉ. महेन्द्र नाथ सिंह द्वारा माल्यापण कर अतिथियों का स्वागत किया गया। संगोष्ठी का संचालन तरूण द्विवेदी तथा रोशन अली द्वारा किया गया। राष्ट्रीय संगोष्ठी के समन्वयक डा0 तरूण दिवेदी ने दसरे दिन के कार्यक्रम व विषय वस्तु की रूपरेखा प्रस्तुत की । उन्होंने इस राष्ट्रीय संगोष्ठी के विषय की प्रांसगिकता पर प्रकाश डाला। तत्पश्चात् डा0 राजेन्द्र कुमार जायसवाल, अर्थशास्त्र विभाग, श्रीगणेशराय डोभी, जौनपुर ने राष्ट्रीय संगोष्ठी का विषय प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला तथा कहाकि वर्तमान समय में तकनीकी ज्ञान के बिना कृषि विकास की कल्पना भी नहीं की जा सकती। इसके बाद संगोष्ठी में डा0 मनोज कुमार मिश्र, सैन्य विज्ञान विभाग, श्रीगणेशराय पी0जी0 कालेज, जौनपुर ने कहा कि ग्रामीण विकास में तकनीकी ज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका होती है देश के तरक्की का रास्ता ग्रामीण विकास से होकर गुजरता है। इसके बाद राष्ट्रीय संगोष्ठी में अपना पक्ष रखते हुए डा0 हीरालाल ने कहा कि तकनीकी का उचित लाभ हमारे किसानों को नही मिल पाया है। किसान आज भी जनसंख्या के गहरे दबाव में है और इस परिस्थिति में उसके पास धन का अभाव होता है जिसके कारण वह तकनीकी ज्ञान व तकनीकी दक्षता से महरूम रहता है। डा0 कमलेश कुमार, व प्रवक्ता आचार्य बलदेव कालेज, कोपा पतरही ने कहा कि सरकारी क्षेत्र की उपेक्षा के कारण भी आज तकनीकी का पर्याप्त प्रसार ग्रामीण क्षेत्रों तक नहीं हो पाया है। यद्यपि सरकार द्वारा पर्याप्त प्रयास निरंतर किया जा रहा है। डा0 अमरकान्त सिंह, प्रवक्ता, समाजशास्त्र, कूबा0पी0जी0कालेज, आजमगढ़ ने कहा कि किसान वर्तमान समय में चौरतफा दबाव झेल रहा है, आज देश की नीति सरकारी चक्रव्यूह में फंसती चली जा रही है और कृषि क्षेत्र राजनीति का शिकार बनते जा रहा है। इस संगोष्ठी में अपना विचार व्यक्त करते हुए डा0 निमिष गुप्ता ने कहा कि तकनीकी का विकास के सकारात्मक व नकारात्मक पहलू भी परिलक्षित होते है। वर्तमान समय संचार क्रान्ति का समय है और संचार क्रान्ति से किसानों को सभी सूचनायें यथा समय प्राप्त करने में आसानी होती है। उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों में बेहद तीव्र गति से तकनीकी का प्रयोग हुआ है और इसका सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिला है। यद्यपि तकनीकी का दुरूपयोग भी समय-समय पर होता है। कार्यक्रम के सत्र में अपना पक्ष रखते हुए सैन्य विज्ञान विभाग के प्रवक्ता डा0 राणा प्रताप सिंह ने कहा कि वर्तमान परिवेश में किसान केवल तकनीकी ज्ञान से ही पिछड़ा नहीं है बल्कि वह आर्थिक मोर्चे पर भी पिछड़ेपन का शिकार है। देश का विकास तभी हो सकता हैजब किसान का विकास होगा। राष्ट्रीय संगोष्ठी के मुख्य अतिथि डा0 हिमांशु रस्तोगी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र का विकास तकनीकी विकास के परिणामस्वरूप ही हो सकता है। यह आज की वास्तविकता है नही तो विश्व व भारत की खाद्यान्न आवश्कताओं को पूरा कर पाना संभव नहीं होगा। आज भारत विश्व की दूसरी सर्वाधिक आबादी वाला देश है और इस बड़े आबादी की खाद्यान्न की आपूर्ति कर पाना परम्परागत खेती के परिणामस्वरूप संभव नहीं है। इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकगण व कर्मचारी की सराहनीय उपस्थिति रही जिसमें डा0 रितेश वर्मा। डा0 रामधीरज यादव, डा0 अजयविक्रम सिंह, डा0 रूपेश, डा0 अशोक यादव, डा0 अशोक सिंह, डा0 दिग्विजय सिंह, डा0 राजीव त्रिपाठी, डा0 अशोक मिश्रा, डा0 शशिभूषण, डा0 सतोंष उपाध्याय,डा0 राधेश्याम मधुकर, श्री प्रमेश प्रताप सिंह आदि का महत्वपूर्ण योगदान रहा। यह जानकारी महाविद्यालय के मीडिया प्रभारी डा0 रूपेश सिंह व सुशील कुमार पाण्डेय ने दी।
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