आजमगढ़ : क़स्बा सरायमीर में शहीदाने कर्बला की याद में ताजिये का जुलूस चौक स्थित अजाखाना अबू तालिब से शुक्रवार को 02 बजे दिन में मजलिस के बाद ताजिया, जुलजनह, शबीह, ताबूत व लम के साथ निकला जो पुराना थाना, रौजा सय्यद अली आश्कान, सिरजी का पूरा मेन रोड होते हुए खरेवां स्थित इमामबाड़ा पंहुच कर ज़ियारते अशुरा पढ़ने के बाद समाप्त हुआ। जुलुस का सञ्चालन करते हुए शिया कमेटी के मीडिया इंचार्ज मोहम्मद हुसैन ने कहा की 10 मोहर्रम सन 61 हिजरी को हजरत मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन ने अल्लाह की रजा और इस्लाम की बका के लिए शहादत दे कर न सिर्फ अपने दौर में तानाशाही हुकूमत को चकनाचूर किया बल्कि पूरी तारीख का रुख मोड़ दिया। इमाम हुसैन और उनके छोटे बड़े साथियों ने दुश्मन की आँखों में आँख डाल कर कहा था कि ज़िल्लत की जिंदगी से इज्जत की मौत बेहतर है। जुलूस में अंजुमन आजाए हुसैन निकामुद्दीनपुर , अंजुमन गुंचए अब्बासिया कोरौली, अंजुमन तंजीमे हुसैनी सरायमीर ने जंजीर व कमा से मातम कर के कर्बला के शहीदों को खिराजे अकीदत पेश किया। आखिर में कमिटी के अध्यक्ष सईद कायम रजा ने सभी का आभार प्रकट किया।
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