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कार्यशाला ::फसल अवशेष जलाने से पर्यावरण व मृदा स्वास्थ्य पर पड़ रहे विपरीत प्रभाव

आज़मगढ़ 06 सितम्बर 2018-- किसानों द्वारा फसल अवशेष जलाये जाने से उत्पन्न पर्यावरण संकट एवं मृदा स्वास्थ्य पर पड़ रहे विपरीत प्रभाव के दृष्टिगत जनपद के विभिन्न विकासखंडों में कार्यशाला आयोजन के दूसरे दिन विकासखंड ठेकमा, बिलरियागंज, रानी की सराय में गोष्ठी एवं प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। विकासखंड रानी की सराय में कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि, संयुक्त कृषि निदेशक, आजमगढ़ मंडल आजमगढ़, सुरेश कुमार सिंह ने कहा कि किसान भाई फसल अवशेष को जलाने के बजाय नव विकसित कृषि यंत्रों से फसल अवशेष को मिट्टी में मिलाएं, इससे कार्बनिक जीवांश की मात्रा में वृद्धि होगी और पर्यावरण प्रदूषण भी नहीं होगा। उनके द्वारा बताया गया कि फसल अवशेष प्रबंधन में उपयोगी कृषि यंत्रों पर सरकार द्वारा 40 से 50 प्रतिशत तक अनुदान किसानों को दे रही है, जिसमें मुख्य रुप से श्रबमास्टर, स्ट्रा रीपर, रीपर कम बाइंडर, हैप्पी सीडर, जीरो टिल सीड ड्रिल, सुपर स्टा मैनेजमेंट सिस्टम इत्यादि यंत्र बहुत ही उपयोगी हैं। इच्छुक किसान विभाग की साइट पर ऑनलाइन मांग करते हुए योजना का लाभ पा सकते हैं। उन्होंने बताया कि आगामी खरीफ फसल में जो किसान फसल अवशेष जलाए जाने के दोषी पाए जाएंगे उनके विरुद्ध माननीय राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा प्रावधानित अर्थदंड लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि फसल अवशेष जलाए जाने के क्षेत्रफल के अनुसार यह अर्थदंड 2500 से लेकर 15000 रुपये तक प्रावधानित है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भूमि संरक्षण अधिकारी संगम सिंह मौर्य द्वारा मृदा स्वास्थ्य कार्ड, सोलर पंप प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना तथा विभागीय अन्य योजनाओं में अनुमन्य अनुदान की विस्तृत जानकारी दी गई। कृषि विज्ञान केंद्र वैज्ञानिक डॉक्टर आर के आनंद द्वारा औषधीय पौधों के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए उसकी खेती किए जाने की सलाह दिया गया। कृषि रक्षा विशेषज्ञ लाल बहादुर सिंह द्वारा धान, अरहर, तिल तथा खरीफ की अन्य फसलों में लगने वाले कीट एवं व्याधियों से बचाव की जानकारी भी दी गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रमुख रानी की सराय प्रतिनिधि, इशरार अहमद ने किसानों को सलाह दी कि स्वास्थ्य से बड़ी कोई दौलत नहीं होती है। अतः सभी किसान भाई कम से कम रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों का प्रयोग करें, स्वास्थ्य कार्ड में दिए गए सलाह के अनुसार संतुलित उर्वरकों का प्रयोग करें।
विकासखंड बिलरियागंज में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उप कृषि निदेशक डॉ आर के मौर्य द्वारा विभागीय योजनाओं की जानकारी देते हुए कृषकों की समस्याओं का निदान किया। जिला उद्यान अधिकारी बालकृष्ण वर्मा द्वारा राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, आयुष योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत बागवानी, सब्जी, फूल, औषधि, मधुमक्खी पालन एवं मशरूम की खेती में अनुमन्य सुविधाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। कृषि विशेषज्ञ राणा पीयूष सिंह ने भी फसल अवशेष प्रबंधन मैं उपयोगी नवविकसित कृषि यंत्रों को अपनाए जाने पर बल देते हुए कृषकों को पशुपालन एवं मत्स्य पालन के बारे में जानकारी दी गई।
विकासखंड ठेकमा में कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सिंचाई बंधु के उपाध्यक्ष प्रमोद कुमार राय ने कृषकों को फसल अवशेष जलाने की प्रवृत्ति को छोड़कर नव विकसित कृषि यंत्रों के माध्यम से उसके प्रबंधन पर बल दिया। जिला कृषि अधिकारी डॉ उमेश कुमार गुप्ता ने कृषि निवेशों, मुख्य रूप से जिंक सल्फेट, सूक्ष्म तत्व, जिप्सम तथा कृषि रक्षा रसायनों पर मिलने वाले अनुदान के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए विकासखंडवार आवंटित बिक्री केंद्रों के बारे में अवगत कराया।
डॉ रणधीर नायक, वरिष्ठ वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र कोटवा ने धान की फसल में सूक्ष्म तत्व की कमी से होने वाले रोगों के बारे में जानकारी देते हुए सल्फर जिंक बोरान मैगनीज एवं मैग्नीशियम की उपयोगिता के बारे में प्रकाश डाला। सभी विकासखंडों में कृषि विभाग के अतिरिक्त उद्यान पशुपालन तथा निजी क्षेत्रों के बिक्री केंद्रों के द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी कृषकों के मुख्य आकर्षण देखा गया। किसान पारदर्शी सेवा योजना के अंतर्गत विभाग द्वारा निशुल्क पंजीकरण शिविर भी लगाया गया था। विकासखंड रानी की सराय में कुल 128 किसान विकासखंड बिलरियागंज में 156 किसान तथा विकास खंड ठेकमा में कुल 187 किसानों को कार्यशाला से लाभान्वित किया। तीसरे दिन विकासखंड मेहनगर, महाराजगंज तथा मोहम्मदपुर में कार्यक्रम विकासखंड मुख्यालय पर आयोजित किया जाएगा।

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