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कहानी 'गुलइची' के पक्ष-विपक्ष में विद्वानों के विचार से रोचक रही परिचर्चा


आजमगढ़: जनसंस्कृति मंच और समाचार पत्र दैनिक देवव्रत के तत्वावधान में रविवार को स्थानीय तमसा प्रेस क्लब सभागार में कथाकार हेमन्त कुमार की कहानी गुलइची पर केंद्रित 'सामाजिक न्याय के अन्तरविरोध के संदर्भ में गुलइची' विषयक परिचर्चा में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए 'गाँव के लोग' के संपादक रामजी यादव ने कहाकि यह कहानी सामाजिक न्याय की दृष्टि से नहीं पढ़ी जानी चाहिए बल्कि यह कहानी भाषा और बुनावट के स्तर पर काफी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराती है लेकिन विचारों के स्तर पर जरूर कुछ कमजोर दिखती है । परिचर्चा की शुरुआत आलोचक कल्पनाथ यादव ने कहाकि कहानीकार संवेदना के स्तर पर गुलइची के पक्ष में या सामंती प्रवृत्ति किस के पक्ष में खड़ा है स्पष्ट होना चाहिए था । प्रसिद्ध कहानीकार और आलोचक मूलचन्द सोनकर ने कहानी को गैर लोकतांत्रिक घोषित करते हुए कहा कि 70 साल की आजादी के पश्चात भी कहानीकार एक सामंती 'घेटो करण' कर रहा है यह उसकी असफलता है और संवैधानिक लोकतांत्रिक चेतना के विरुद्ध है । कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जयप्रकाश नारायण ने कहा कि हेमंत की कहानी गुलइची सामाजिक न्याय के अन्तर्विरोध को रेखांकित करती है यदि सामाजिक न्याय समानता तक नहीं जाता है तो उसका कोई मतलब नहीं है, व्याख्यान को आगे बढ़ाते हुए कहाकि सामाजिक न्याय एकरेखीय नहीं होता इसका स्वरूप व्यापक होता है इसे विस्तृत नजरिये से देखा जाना चाहिए । परिचर्चा को रविन्द्रनाथ राय, रामकुमार यादव, अरविन्द, रामबदन यादव, डा. बद्रीनाथ ने संबोधित किया । परिचर्चा का संचालन विजय कुमार देवव्रत और धन्यवाद ज्ञापन डा. रमेश कुमार मौर्य ने किया । सर्वश्री बैजनाथ यादव, डा. विनय सिंह यादव, रामनिवास यादव, महताब आलम, राम अवध यादव, नरेन्द्र प्रताप, बृजेश राय, अश्विनी कुमार, रामसिंह यादव, यमुना प्रजापति, हंसराज यादव, मोतीराम, सुरेन्द्र कुमार चांस, रमेश गौतम, जगदीश शर्मा, अब्दुल्ला शेख, छेदी सिंह, नित्यानंद यादव आदि लोगों ने परिचर्चा में प्रतिभाग किया । 

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रिपोर्ट आज़मगढ़ लाइव

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