आजमगढ़। गत 8 नवम्बर देर सायंकाल स्वाधीनता संग्राम सेनानी स्मृति केन्द्र के तत्वावधान में राहुल नगर स्थित अमरनाथ तिवारी के आवास पर प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी और उ.प्र. मंत्रिमण्डल में 1974 के सदस्य स्व. पं. रामविलास पाण्डेय की पुण्यतिथि श्रद्धा पूर्वक मनायी गयी। इस अवसर पर स्वतंत्रता संग्राम के विभिन्न चरणों में आजमगढ़-मऊ जनपद के स्वतंत्रता सैनिकों के योगदान की चर्चा की गयी। इस संगोष्ठी के मुख्य वक्ता साहित्यकार डा. कन्हैया सिंह ने कहा कि पं. रामविलास पाण्डेय और डा. रामहरख सिंह जनपद के स्वतंत्रता संग्राम में अभूतपूर्व योगदान के लिए सदैव याद किए जायेंगे और हाल ही में इनकी मृत्यु हो गयी। पं. रामविलास पाण्डेय सन् 1969-74 तक उत्तर प्रदेश विधान सभा के सदस्य और प्रदेश मंत्रिमण्डल में शामिल रहे किन्तु वह शान शौकत से पूर्णतया मुक्त थे। स्वाधीनता संग्राम स्मृति केन्द्र के अध्यक्ष अमरनाथ तिवारी जिन्हें सन् 1942ई. की क्रांति सगड़ी तहसील मुख्यालय पर झ्ाण्डा फहराने के लिए कान पकड़ कर उठाया बैठाया गया था, विस्तार पूर्वक जनपद और विषेषकर मधुबन(मऊ) काण्ड का स्मरण करते हुए कहा कि स्व. रामविलास पाण्डेय का जन्म जुलाई 1918ई. में इटौरा ग्राम- घोसी में हुआ था किन्तु उनका कार्य क्षेत्र आजमगढ़ ही था। सन् 1940ई. में पहली बार उनको 6 मास की जेल की सजा हुयी थी। सन् 1942 के ऐतिहासिक मधुबन काण्ड के सिलसिले में इन्हें 12 वर्ष की कड़ी जेल सजा हुयी थी। सन् 1946 में बृटिष सरकार से एक समझ्ाौते के आधार पर देष स्तर पर जब स्वाधीनता सैनिकों की रिहाई हुयी, स्व. पाण्डेय जी भी आजमगढ़ जेल से छोड़े गए। डिस्ट्रिक बोर्ड एवं जिला परिषद एवं विधान परिषद आदि के सदस्य चुने जाते रहे। उन्होने बतौर एक लेखक भी कार्य किया। ‘‘कहां गये वे लोग’’ इनकी प्रसिद्ध रचना है। स्व. पाण्डेय जी की सबसे बड़ी विषेषता यह थी कि इन्होनें कभी दल बदल नहीं किया। कार्यक्रम का संचालन श्री जनमेजय पाठक ने किया। इस श्रद्धांजलि समारोह एवं संगोष्ठी में सर्वश्री दिवाकर तिवारी, ब्रजेष नन्दन पाण्डेय, प्रभुनारायण पाण्डेय प्रेमी, विजयधारी पाण्डेय, रवीन्द्र नाथ त्रिपाठी, सतीष कुमार मिश्र, बद्री प्रसाद गुप्ता, रत्नाकर दुबे, राजीव रंजन तिवारी, निषीथ रंजन तिवारी, गोपाल दादा, राजकिषोर सिंह, रामजनम निषाद, आषीष मिश्र आदि प्रमुख लोग उपस्थित रहे और अपने-अपने विचार प्रकट करते हुए स्व. रामविलास पाण्डेय जी को श्रद्धांजलि अर्पित किए।
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