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जनपद स्तरीय रबी उत्पादकता गोष्ठी/किसान मेला एवं कृषि प्रदर्शनी आयोजित

आजमगढ़ 10 नवम्बर -- राजकीय पौधशाला कोटवा के प्रागंण में जिलाधिकारी चन्द्रभषण सिंह की अध्यक्षता में जनपद स्तरीय रबी उत्पादकता गोष्ठी/किसान मेला एवं कृषि प्रदर्शनी तथा विभिन्न पारिस्थिति की कीट रोग नियन्त्रण कार्यक्रम अन्तर्गत कृषक एवं प्रसार कर्मी का प्रशिक्षण आयोजित हुआ। गोष्ठी का शुभारम्भ जिलाधिकारी द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। इस अवसर पर ‘‘कृषि विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के अन्तर्गत कृषको को अनुमन्य सुविधायें‘‘ फोल्डर का विमोचन मुख्य अतिथि द्वारा किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जिलाधिकारी चन्द्र भूषण सिंह द्वारा अपने उद्बोधन में बताया कि जैविक खेती आज समय की मांग है। आने वाली पीढियों को यदि कुछ आप देना चाहते हैं तो आपको जैविक खेती को अपनाना ही होगा। क्योकि यह पुरातन परम्परा भारतीय ऋषि मनिषियों के द्वारा प्रमाणित विधियां रहीं हैं। जिससे उत्पादन पर थोडा बहुत प्रभाव पड़ सकता है। लेकिन इससे उत्पादित खाद्यान्नों, फलो, सब्जियों का पोषकमान इतना गुणवत्तापूर्ण होगा जो आपको विभिन्न रोग, बीमारियों से बचाकर रख सकेगा।
जिलाधिकारी ने बताया कि कि आज का समाज संक्रमण काल से गुजर रहा है जिसमें हम अपनी कुछ पुरानी विरासतों को ठीक से न समझ पाने के कारण उसके उपयोग से बच रहे हैं एवं नई तकनीकी को भी अपनाने से हिचक रहे हैं। जबकि होना यह चाहिए कि परम्परागत चीजों की प्रमाणिकता को समझते हुए खेती एवं ग्रामीण संस्कृति को अक्षुणय बनाये रखें।
श्री सिंह ने सृजन कृषि विकास एवं अनुसंधान संस्थान बाराबंकी, उ0प्र0 के निदेशक डा0 भूपेन्द्र कुमार मौर्य के प्रशिक्षण की सराहना करते हुए कहा कि जितने आत्मबल के साथ डा0 मौर्य अपनी बात कह रहे हैं इससे प्रतीत होता है कि इनका कार्य धरातल पर है और अपने स्मृतियों को ताजा करते हुए बताया कि प्राथमिक कक्षाओं में गोबर, गोमूत्र एवं हृयूमस को पढ़ा गया था लेकिन आज इनके वक्तव्य से इसका महत्व पुनः मानस पटल पर ताजा हो गया है। इनके इन शानदार उद्बोधन के लिए बधाई दी।
कार्यक्रम में संयुक्त कृषि निदेशक डा0 एसके सिंह ने उपस्थित कृषकों को सीडड्रिल से बुवाई के सम्बन्ध में जानकारी देते हुए बताया कि इस मशीन से गेहूं अथवा अन्य रबी फसलों की बुवाई में बीज की मात्रा छिटकवा बुवाई की अपेक्षा 25-30 प्रतिशत कम लगती है एवं उर्वरक फसल के जड़ के अत्यंत नजदीक होता है, जिसका पौधे अधिकतम उपयोग करते हैं एवं लाईन से बोई गयी फसल पर फरवरी के दूसरे पक्ष एवं मार्च के प्रथम पक्ष में तेज पछुवां हवा का प्रभाव भी कम पड़ता है, जिससे छिटकवा बुवाई की अपेक्षा उत्पादन में भी 20-25 प्रतिशत की वृद्धि होती है।
उप कृषि निदेशक डा0 आर0के0 मौर्य नेे बताया कि आगामी रबी सीजन में जनपद में 251238 हे0 पर गेहूॅ, जौ, चना, मटर, मसूर रबी मक्का, तोरिया, राई, सरसो आदि की खेती की जायेगी। जिसमें सबसे अधिक 232725 हे0 गेहूॅ की खेती की जायेगी। जिसके लिए कृशि विभाग एवं शीर्ष संस्थाओं द्वारा 26991 कु0 एवं निजी क्षेत्र द्वारा 84907 कु0 गेहूॅ बीज की व्यवस्था की गयी है गेहूॅ का बीज प्रतिस्थापन दर 43 प्रतिशत तथा अन्य फसलों के बीज कृषि विभाग एवं निजी क्षेत्र द्वारा 4283 कु0 की व्यवस्था की गयी है। इस वर्ष गेहूॅ के प्रमाणित बीज का मूल्य शासन द्वारा 3100.00 रू0 प्रति कु0 निर्धारित किया गया है जिसमें 10 वर्ष तक की गेहूॅ की समस्त प्रजातियों पर केन्द्राशं एवं राज्याशं मिलाकर रू0 1600.00 प्रति कु0 या मूल्य का 50 प्रतिशत जो भी कम हो अनुमन्य अनुदान उपलब्ध है। इसी प्रकार दलहनी फसलों पर अधिकतम रू0 4000.00 प्रति कु0 एवं तिलहनी फसलों पर रू0 3300.00 प्रति कु0 अथवा मूल्य का 50 प्रतिशत अनुदान उपलब्ध है। उनके द्वारा किसान भाईयों को आश्वस्त किया गया कि सरकार द्वारा क्रियान्वित समस्त योजनाओं का लाभ किसान भाईयों तक पहुॅंचाया जायेगा।
इस अवसर पर उप कृषि निदेशक (कृषि रक्षा) गोपालदास द्वारा रबी फसलों के बुवाई के पहले भूमि उपचार एवं बीज उपचार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए जैव उर्वरक ट्राईकोड्रर्मा द्वारा भूमि शोधन के बारे में जानकारी प्रदान की गयी तथा इसके उपलब्धता के सन्दर्भ में बताया गया कि जनपद के प्रत्येक कृशि निवेश विक्रय केन्द्र पर 75 प्रतिषत अनुदान पर उपलब्ध है। इसके उपयोग से भूमि जनित एवं बीज जनित रोगों से पूर्णतः सुरक्षा प्रदान होती है।
अन्त में डा0 उमेश कुमार गुप्त, जिला कृषि अधिकारी द्वारा कार्यक्रम में आये हुए समस्त सम्मानित अतिथियों, प्रगतिशील कृषकों का आभार प्रकट करते हुए इस कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु आग्रह किये। कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केन्द्र वरिष्ठ वैज्ञानिक डा0 रुद्र प्रताप सिंह, डा0 एल0सी0 वर्मा, संगम सिंह, भूमि संरक्षण अधिकारी डा0 रामकेवल यादव, सलाहकार, रा0खा0सु0मि0, उप परियोजना निदेशक (आत्मा) डा0 हरिनाथ यादव, डा0 पंकज सिंह, जनपद के समस्त विकास खण्डों के सहायक विकास अधिकारी (कृषि), तकनीकी सहायक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन जनसेवाश्रम के सचिव कमला सिंह तरकस द्वारा किया गया। 

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रिपोर्ट आज़मगढ़ लाइव

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