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1952 से नहीं हुई चकबंदी,प्रयास संगठन ने मंडलायुक्त को सौंपा ज्ञापन

आजमगढ़: भू-माफियाओं पर शासन भले ही नकेल कसने के लिए कानून बना रहा हो लेकिन जिला चकबंदी विभाग की उदासीनता व भू माफियाओं की मिलीभगत से ब्लाक तहबरपुर के ग्राम पंचायत ददरा-भगवानपुर अंतर्गत पोहीपुर गांव का 1952 से आज तक कभी चकबंदी ही नहीं हो सका। इसी को लेकर शुक्रवार को सामाजिक संगठन प्रयास का एक प्रतिनिधिमंडल मंडलायुक्त आजमगढ़ को पांच सूत्री ज्ञापन दिया और उक्त गांव में तत्काल चकबंदी कराये जाने की मांग उठायी।
ज्ञापन सौंपने के दौरान संस्था के जिला प्रभारी बाबू राम यादव पार्थ ने बताया कि पोहीपुर गांववासियों की विडम्बना रही कि 96 बीघे फैले इस गांव में 22 बीघा जमीन बंजर, चाराहगाह इत्यादि है शेष 74 बीघा जमीन कृषि योग्य है। विभागीय लापरवाही का इससे इच्छा बानगी नहीं हो सकती कि यहां 1952 में पहली चकबंदी हुआ तो और यह आज तक अंतिम बना हुआ है। 65 वर्षो तक आज तक कोई चकबंदी न होने से भू माफिया, दबंगों द्वारा कृषि एवं बंजर भूमि पर बड़े पैमाने पर अवैध रूप से कब्जा कर चुके है। जिसके चलते आम कृषकों का आज तक विकास से कोसो दूर हैं। यही नहीं मंडलायुक्त को आगे बताया कि चकबंदी न होने से गांव में सड़के, पानी निकासी, शौचालय आदि निर्माण में आये दिन विवाद उत्पन्न हो जाता है। 65 वर्षो से चकबंदी न होने से किसान मुकदमेबाजी में फसंता जा रहा है। अध्यक्ष रणजीत सिंह ने कहा कि शासन ग्रामीणों से तमाम टैक्स वसूलता है लेकिन आज तक इन्हें मूलभूत सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही है जिसके कारण यह ग्रामीण खुद को ठगा सा महसूस कर रहे है। इसी उपेक्षा को लेकर प्रयास संगठन की पहल पर शुक्रवार को पोहीपुर वासी मंडलायुक्त से रूबरू हुए और अपना दर्द साझा करते हुए तत्काल चकबंदी कराये जाने की आवाज बुलंद की।
इस अवसर पर बाबूराम यादव जिला प्रभारी, सचिव इंजी सुनील यादव, ग्राम प्रधान श्रीमती राजकुमारी, फेकू, ललसू यादव, प्रेमप्रकाश यादव, रविन्द्र यादव, दयाराम यादव, लालता यादव, साहब यादव, रिन्कू सिंह सहित ग्रामीण मौजूद रहे।

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रिपोर्ट आज़मगढ़ लाइव

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