आजमगढ़ : समाजवादी पार्टी के गढ़ में जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी बचाना सपाइयों के लिए प्रतिष्ठा का विषय बन गया है। विरोधी गुट द्वारा जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाए जाने के लिए ज्ञापन सौंपने के बाद जिले का सियासी पारा इस समय चढ़ गया है। हालांकि लगता तो अब यह है कि फैसला सदन में ही होगा कि ऊंट किस करवट बैठता है। मंगलवार को विरोधियों द्वारा अविस्वाश प्रस्ताव से सम्बन्धित सदस्यों की सूची प्रशासन को सौंपने के बाद बुधवार को जवाब देते हुए सपा जिलाध्यक्ष हवलदार यादव और सदर विधायक दुर्गा प्रसाद यादव भी आज आगे आये और उन्होंने प्रशासन के सामने दावा किया की मंगलवार के दिन पेश की गयी सूची में कुछ सदस्य सपा की पंचायत अध्यक्ष मीरा यादव के समर्थन में हैं और अविश्वास प्रस्ताव पर उनके हस्ताक्षर फ़र्ज़ी हैं , सूत्रों के अनुसार उनके साथ वो दो महाप्रधान भी मौजूद थे जिनके नाम अविश्वास की सूची में थे। गौरतलब है की सूबे में भाजपा की सरकार बनने के पांच माह बाद जिले के हरैया और उसके बाद कोयलसा ब्लाक प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भाजपा खेमे की तरफ से प्रस्तुत किया गया था। हरैया में तो सपा को मात देने में कामयाबी मिल गई लेकिन कोयलसा में अविश्वास प्रस्ताव गिर गया। अभी ब्लाक प्रमुख के उपचुनाव हुए कुछ ही समय बीता कि विरोधी खेमे का हमला दो दशक से सपा के कब्जे में रही जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर होने लगा है। इसकी अगुवाई कर रहे हैं सपा के एक पूर्व मंत्री के भतीजे, जो काफी समय पहले ही सपा के खिलाफ बगावत का बिगुल बजा चुके हैं। अब जब भाजपा की सरकार बनी तो उन्हें सत्ताधारी पार्टी के एक दिग्गज नेता और कुछ अन्य विरोधी खेमे के जिला पंचायत सदस्यों का साथ मिल गया। नतीजा 84 सदस्यों के सदन के 46 जिला पंचायत सदस्यों के हस्ताक्षरयुक्त अविश्वास प्रस्ताव का ज्ञापन प्रभारी जिलाधिकारी व मुख्य विकास अधिकारी अभिषेक सिंह को मंगलवार को ही सौंप दिया गया। अविश्वास प्रस्ताव के लिए अब जिलाधिकारी द्वारा ज्ञापन सौंपने के 15 दिन के बाद की तारीख तय की जाएगी। सभी जिला पंचायत सदस्यों को नोटिस भी भेजी जाएगी। नियम के अनुसार 30 दिन के अंदर या फिर 20 या 21 सितंबर की तारीख तय हो सकती है।
Blogger Comment
Facebook Comment