आजमगढ़। मुबारकपुर नगर में सम्मिलित अमिलो के महाजन की बाग में शनिवार की शाम तहफ्फुज़-ए-शरीयत कांफ्रेंस का आयोजन किया गया। जिसमें नगर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भाग लिया। इस अवसर पर उलेमाओं ने दीन की रोशनी में तीन तलाक व मुस्लिम महिलाओं के हक व अधिकार पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम का आगाज़ नईम अज़हर ने तिलावते कलाम पाक से किया और नाते पाक का नज़राना ओसैद मऊवी ने किया। इस के पश्चात मुख्य वक्ता हज़रत मौलाना सैयद मेराज रब्बानी ने कहा कि शरीयत में किसी प्रकार का दखल देने का हक व अधिकार किसी भी इंसान को नहीं है। कुदरत का बनाया हुआ कानून हर मुसलमान दिल से मानता है और उस पर अमल करता है। चाहे वह मर्द हो या औरत कोई भी कतई कुदरत के कानून को शंशोधन करने की बात को बर्दाश्त नहीं करेगा। अल्लाह के बनाये हुए कानून पर चलने में ही हम सब की भलाई और कामयाबी है। इसी कड़ी में हज़रत मौलाना ज़फर सल्फी ने कहा कि इस्लाम में किसी प्रकार का फेरबदल सरकार के किसी भी राजनेता या अधिकारी को नहीं करना चाहिए। हज़रत मौलाना अब्दुल रहमान दिलावर ने कहा कि मुसलमान सबकुछ बर्दाश्त कर सकता है, शरीयत में दखल नहीं बर्दाश्त करेगा। इस्लाम मज़हब में हर समस्या का हल शरीयत और हदीस की रौशनी में बताया गया है। अल्लाह और अल्लाह के दिखाये हुए रास्ते पर चलने से हर मुसलमान दुनिया में भी कामयाब है और उसकी आखरत भी संवरती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता अब्दुल रहमान साहब रहमानी व संचालन मौलाना फारूक अब्दुल्लाह ने किया। इस अवसर पर मुस्लिम समुदाय के अकीदतमंद भारी संख्या मेें मौजूद थे।
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