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रामनरेश सेवाभाव से राजनीति करने वाले, सादगी,ईमानदारी के प्रतीक एक सच्चे नेता थे - कांग्रेस अध्यक्ष

रामनरेश यादव यादव के निधन से कांग्रेसजनों में शोक की लहर                                          आजमगढ़। उ0प्र0 कांग्रेस कमेटी के बैनर तले जिला कांग्रेस कार्यालय पर जिलाध्यक्ष हवलदार सिंह की अध्यक्षता में शोक सभा का आयोजन किया गया जिसमें राज्यपाल, रामनरेश यादव के आत्मा की शान्ती के लिए ईश्वर से प्रार्थना की गयी। शोकसभा में जिलाध्यक्ष हवलदार सिंह ने कहां कि स्व यादव की राजनीति नैतिक मूल्यों पर आधारित थी यही नहीं उनका समूचा जीवन भी नैतिक मूल्यों पर आधारित रहा। इसलिए जनपद के लोग इन्हें देश के दूसरे गांधी की संज्ञा देते थे। उनके निधन से पुरानी परम्परा के सेवाभाव से राजनीति करने वाले, सादगी व ईमानदारी के प्रतीक एक सच्चे नेता का अंत हो गया। वक्ताओं ने बताया कि रामनरेश यादव का जन्म एक जुलाई 1927 को जनपद के अम्बारी के समीप आंधीपुर गांव में एक साधारण परिवार में हुआ था। स्व. यादव की प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा अंम्बारी में हुई थी, इसके बाद उन्होंने इंटर की शिक्षा शहर के वेस्ली इंटर कालेज में प्राप्त किया और उच्च शिक्षा एमए, एलएलबी बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से प्राप्त किया। शुरूआत में उन्होंने एंग्लो बंगाली इंटर कालेज, वाराणसी में हिन्दी के प्रवक्ता भी रहे। इसके बाद वे आजमगढ़ आ गये और 1953 में जिला कलेक्ट्रेटी में वकालत की शुरूआत किया। उस दौरान देश की स्थिति को देख वे समाजवाद आंदोलन से जुड़ गये। वे आर्चाय नरेंद्र के कार्यो से काफी प्रभावित थे। आपात काल में वे 19 महिने जेल में गुजारे। 1977 में जनता पार्टी से आजमगढ़ सदर लोकसभा सीट से निर्वाचित हुए। इसके बाद एटा जनपद के निधौली कला सीट से विधायक बने और 1977 में प्रदेश के मुख्यमंत्री पद पर आसीन हुए। इसके बाद 1985 में शिकोहाबाद से विधायक चुने गयें। वे 1989 में राज्यसभा के सदस्य बनाये गये और राजीव गांधी से प्रभावित होकर कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए। इसके बाद कांग्रेस के केंद्रीय चुनाव समिति के सदस्य सहित कई पदों पर रहे। 1996 व 2002 में फूलपुर विधानसभा से विधायक चुने गये। 8 सितम्बर 2011 से 2016 तक मध्य प्रदेश के राज्यपाल रहे। स्व यादव विलक्षण प्रतिभा के धनी, जनसेवा की भावना से ओत-प्रोत व समाज के प्रति समर्पित थे। स्व यादव प्रदेशो में अनेकों पुलों का जला बिछवाया जो आज मिल का पत्थर है। जनपद के विकास के लिए उन्होंने निरंतर कार्य किया और देवारा क्षेत्र के लिए बेहद चिंतित रहते थे इसलिए उन्होंने महुला गढ़वल बांध का निर्माण कराया जो आज कई गांवों को घाघरा के दंश से बचाते हुए है। अंत में दो मिनट का मौन रखकर दिवगंत आत्मा की शांति के लिए कांग्रेसजनों ने ईश्वर से प्रार्थना किया। शोकसभा के बाद उनके चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित करने वालो में लालसा राय, चंद्रपाल सिंह यादव, ज्ञानेंद्र सिह ज्ञानू, डा हेमबाला, डा अशोक सिंह, राजमंगल सिंह, सुमन सिंह, श्यामधारी राम, रामाश्रय राय, विपिन पाठक, सत्यप्रकाश मिश्रा, चंद्रा तिवारी, हबीबा खातून, बेगम अब्बासी, प्रेमा चैहान, रामअवध यादव, प्रवीण सिंह, भजु राम, राजनेत, रामाज्ञा यादव, सिंकदर यादव, अवधेश सोनकर, शिवकुमार मौर्या, शंभू शास्त्री, रविन्द्र गुप्ता, अशोक गुप्ता, फूलबदन चैरसिया, अनुराग तिवारी, राम सिंह, कर्मचंद्र भारती, मुनई राम, अब्दुल रहमान, राधेश्याम गुप्ता, बलवीर सिंह, सूरज विश्वकर्मा, राजमणिम यादव, कमलेश देवी आदि कांग्रेसजन शामिल रहे। रात में उनके पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव आँधीपुर, अम्बारी लाया जायेगा। 23 नवम्बर की सुबह 9 बजे अंतिम दर्शन व श्रद्धाजंलि अर्पित करने के बाद 11.00 बजे दिन में जनता इण्टर कालेज में श्रद्धाजंलि अर्पित किया जायेगा। तद्पश्चात् दुर्वासा आश्रम के संगम पर लगभग 1.00 बजे दिन में अन्तिम संस्कार किया जायेगा।

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रिपोर्ट आज़मगढ़ लाइव

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