आजमगढ़ : 19 जुलाई : बिहार प्रांत में औरंगाबाद जिले के सोनदाहा जंगल में सोमवार को नक्सलियों द्वारा बारूदी सुरंग बिछाकर किए गए हमले में जिले के लाल ने भी अपनी शहदत दे दी । सीआरपीएफ जवान की शहादत की सूचना से निज़ामबाद के गौसपुर गांव में ही नहीं बल्कि आसपास के क्षेत्र में भी मातम पसरा है। सोमवार का सूरज जिले के साथ ही निज़ामबाद तहसील के गौसपुर गांव में शोक की लहर ले आया जब बीती रात बिहार में नक्सली हमले में सिनोद कुमार शहीद हो गया। घटनाक्रम के अनुसार सोमवार को सिनोद अपने साथी जवानों के साथ बिहार के औरंगाबाद व गया जिले की सीमा पर स्थित सोनवाहा जंगल में कांबिंग पर निकला था। जवानों का वाहन जैसे ही डुमरी नाले के पास पहुंचा नक्सलियों द्वारा किए गए सीरियल आईईडी बिस्फोट में सीआरपीएफ के 10 जवान शहीद हो गए। शहादत देने वाले जवानों में यूपी के दो, बिहार के तीन, पश्चिम बंगाल के दो, पंजाब के एक, मध्य प्रदेश के एक सहित अन्य जवान शामिल बताए गए हैं। मंगलवार की सुबह सीआरपीएफ के अधिकारी द्वारा शहीद के भाई विनोद को फोन पर छोटे भाई की शहादत की सूचना जब मिली तो कोहराम मच गया । इस घटना ने शहीद की जान तो ले ही ली लेकिन उसके साथ ही एक पूरे परिवार पर मनो दुखो का पहाड़ ही टूट पड़ा । सबसे दुखद यह है कि सिनोद एक माह के अंदर ही पिता बनने वाला था लेकिन वह ख़ुशी भी उसे नसीब न हो सकी। पत्नी जान्हवी का रो-रोकर बुराहाल है। अभी पिछले वर्ष 9 मई 2015 को सिधारी गेलवारा गांव में उसकी शादी हुई थी, अब जान्हवी गर्भवती हैं और 15 -20 दिन के अंदर वह माँ बनना वाली है । शहीद की बूढी माँ कवलपति देवी जिसके बुढ़ापे की लाठी छिन गई उसका भी हाल बुरा है जो रुक-रुक कर बेहोश हो जा रही है, पिता तूफानी राम तो जैसे सुध-बुध खो बैठे है उसका समझाने और ढाढस बढ़ाने वालो का तांता लगा हुआ है। केवल सिनोद का परिवार ही नहीं आस-पास के गांव वालों का हुजूम उमड़ पड़ा और हर शख्स की आँखों में आंसू की धारा बह रही थी। सिनोद का परिवार अभी संयुक्त है एक बड़ा भाई विनोद जो मुंबई में नौकरी करता है वह 15 दिन पहले ही घर आया है। उसकी दो बहने रीता और अनीता सभी का रो कर बुरा हाल है। मिलनसार व्यक्तित्व के स्वामी सिनोद (24) वर्ष 2011 में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल में आरक्षी पद पर भर्ती हुए । इलाहाबाद में प्रशिक्षण के बाद उन्हें उड़ीसा में तैनाती मिली थी । ढाई वर्ष पूर्व सिनोद की तैनाती बिहार प्रांत में सीआरपीएफ की कोबरा कमांडो यूनिट में की गयी। तभी से वह यहां तैनात थे। सोमवार को सिनोद अपने साथी जवानों के साथ बिहार के औरंगाबाद व गया जिले की सीमा पर स्थित सोनवाहा जंगल में कांबिंग पर निकला था और आई इ डी विस्फोट में अन्य जवानों के साथ वह वीरगति को प्राप्त हुआ । देर रात तक शहीद का शव पहुंचने की सम्भावना जताई जा रही है ।
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