आजमगढ़ : अस्पतालों में फार्मासिस्टों की नियुक्ति सहित दो सूत्रीय मांगों को लेकर मंडल के फार्मासिस्टों ने शनिवार को कलेक्ट्रेट पर धरना दिया। इस दौरान अधिकारियों पर धनउगाही कर मनमाने ढंग से नियम के विपरीत मेडिकल स्टोर व दवाखानों के संचालन का आरोप लगाया साथ ही बिना फार्मासिस्ट के प्रसव और टीकाकरण के दौरान एएनएम द्वारा किये जा रहे दवाओं के उपयोग पर भी सवाल उठाया। मांग पूरी न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी।
मंडल अध्यक्ष विनय कुमार यादव ने कहा कि प्रदेश में 25 हजार उपकेंद्रो पर नवजात शिशु एवं गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण, उपचार, प्रसव की सुविधा है। दवाओं एवं टीका का प्रयोग बिना रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिसनर के एएनएम द्वारा किया जा रहा है। यह पूरी तरह गैरकानूनी और आम आदमी के स्वास्थ्य के साथ मजाक है। नियमानुसार यहां फार्मासिस्ट की उपस्थिति अनिवार्य है। इसलिए सरकार तत्काल फार्मासिस्ट की नियुक्ति सुनिश्चित करे। उन्होने कहा कि आम आदमी एंव समाज को सुरक्षित एवं नियंत्रित दवाओं की प्रतिपूर्ति करने के लिए मेडिकल स्टोरों, निजी क्लीनिक, नर्सिंगहोम, प्राइवेट अस्पतालों में बीयूएमएस, बीएएमएस आदि डिग्ग्रीधारकों द्वारा एलोपैथी का प्रयोग करना आम आदमी के स्वास्थ्य के साथ मजाक है।
यह जानलेवा भी हो सकता है। फार्मेसी एक्ट 1984 एवं ड्रग्स एण्ड केमिस्ट एक्ट 1940-45 फार्मेसी पै्रक्टिस का अनुपालन सुनिश्चित होना आवश्यक है लेकिन स्थितियां उलट हैं। जिम्मेदार अधिकारी सुविधा शुल्क लेकर बिना फार्मासिस्ट के ही दवाओं की बिक्री कर आम आदमी के जीवन से खेल रहे हैं। इसलिए सभी मेडिकल स्टोरों का भौतिक सत्यापन कर डाटा ऑनलाइन होना चाहिए।
प्रदेश अध्यक्ष अमित श्रीवास्तव ने कहा कि डब्ल्यूएचओ के अनुसार 2020 के बाद भारत में 90 प्रतिशत दवाएं सिर्फ इसलिए बेकार हो जायेंगी क्योंकि दवाओं का गलत उपयोग किया जा रहा है। इसलिए जहां दवा है, वहां फार्मासिस्ट का होना अनिवार्य है। अंत में मंडलायुक्त को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। इस मौके पर कोषाध्यक्ष रामनरायन कौशल, शशिभूषण सिंह, अजीत सिंह, विजय गुप्ता, राधाकृष्णन, जयप्रकाश, संजय यादव, अश्वनी, गोविंद, राजेश गुप्ता, सतीश तिवारी, जावेद, जैद, अतुल, देवेंद्र, विजय चौहान, कुसुम लता, धर्मेन्द्र यादव आदि उपस्थित थे।

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