होली पर आयोजित हुआ महामूर्ख सम्मेलन
इस दौरान कार्यक्रम के संचालक वैभव वर्मा ने चिरइता क काढ़ा इ हौ भइया चिरइता कै काढ़ा, पीयले ये के एक दिन बनवारी, पियते तिरवेनी साव के देहने गारी, कहने घरवा में कुल हवय पाड़ा, बाबू इ है चिरइता कै काढ़ा। मंत्री जी एक दिन पी के अजमउलन, भाभी के काने में जाके बतउलन, सरका ला खटिया लगत बा जाड़ा, इ हौ भइया चिरइता कै काढ़ा सुनाकर लोगों को ठहाके लगाने के लिए विवष कर दिया। वहीं एक अन्य गीत जब तक चाहब रहब एमएलए तोहरे बाप क का, सबके ठोकब हम अकेले तोहरे बाप का सुनकर लोग हंसते हसते लोट पोट हो गये। हास्य कवि अशोक अश्क ने सबपर भारी अकेली बनवारी, अपने दुकानदारी पे जे भी बइठउलय समझा ओकर गइल दुकानदारी सुनाया तो पूरा पांडाल ठहाकों से गूंज उठा।
कार्यक्रम के दौरान राज्य मंत्री राम दुलार राजभर को मूर्ख, सपा जिलाध्यक्ष हवलदार यादव को मूर्ख अध्यक्ष तथा बनवारी लाल जालान को मूर्ख पत्रकार के खिताब से नवाजा गया। सभी अथितियों का स्वागत सब्जी की माला से किया गया। इस दौरान सलीम अहमद पप्पू और अयाज अहमद ने अपनी रचनाओं से कौमी एकता पर बल दिया। इस मौके पर डॉ. प्रमोद खेतान, दीनू जायसवाल, शिवकुमार रुंगटा, डॉ. अशोक सिंह, राधेश्याम डालमिया, संत प्रसाद अग्रवाल, कृष्ण कुमारी अग्रवाल आदि उपस्थित थे।


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