जनपद के सभी रेंजों में वितरण हो रहा घोंसला
छात्रों को 14 मार्च को दिलाया जायेगा शपथ
20 मार्च को बच्चे देखेंगे डाक्यूमेंट्री फिल्म
आजमगढ़। चूं.चूं करती गौरैया फिर आंगन में लौटेंगी। इसके लिए वन विभाग ने गौरैयों के आवास और प्रजनन के लिए लकड़ी के घोंसले बनवाकर बच्चों में वितरण का कार्य शुरू किया है। 20 मार्च को मनाए जाने वाले विश्व गौरैया दिवस से पहले विभाग को इस कवायद का रिजल्ट देना है। गौरैयां की संख्या कम होने से वातावरण,बारिस व आक्सीजन पर प्रभाव पड़ रहा है। शहरीकरण के चलते आधुनिक घरों में गौरैया को घोंसला बनाना दूभर हो गया है क्योकि ज्यादा तक गौरैया कच्चे मकान व पेड़ो पर ही घोसला लगाती है। पेड़ पौधे कट रहे है और वातवरण में प्रदूषण बढ़ रहा है जिसके चलते गांवों / शहरों में मोबाइल टॉवरों का जाल फैल रहा है। मोबाइल टॉवरों की इलेक्ट्रो मैगनेटिक किरणें गौरैया प्रजाति को कम रही है इसके साथ ही साथ इनके अंन्दर प्रजनन की क्षमता कम हो रही है। हमारे पूर्वजों ने गौरैया के संरक्षण के लिए हर घरों में चावल के दाने बिखेरने की परमपरा रही क्योकि लोगो की मान्यता रही है कि जिन घरो में गौरैया का वास होगा वहां सम्मपन्ता एंव समृद्वि अपने आप ही प्राप्त हो जायेगी। परन्तु वर्तमान परिस्थितियों में हमारी पुरानी मान्यताआें एंव परम्पराआें को लोग भी मान रहे रहे है जिसके चलते आज गौरैया के संरक्षण कि स्थिति उत्पन्न हो गई है। आज आवश्कता इस बात कि है कि हम पुन:गौरैया को बचाने के लिए अपने घरों में अन्न के दानो को बिखेरे एंव साथ ही साथ उनके घोसलोें के निर्माण के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध कराये। या फिर लकड़ी के बनावटी घोसलों को अपने घरो में झूलो की तहर लटकाने की व्यवस्था करे जिससें गौरैया के प्रजाति को बचा कर अपने वातावरण कि रक्षा कर सकें। घर के बड़े बुर्जुगों की नैतिक जिम्मेदारी है कि वह छोटे बच्चों को गौरैया के विषय में जानकारी दे एंव उनके घोसलो से बच्चों को दूर रखने की हिदायाद दे ताकि वह प्राकृतिक एंव सहज रूप से प्रजनन एंव अपने अण्डो की रक्षा करने में कोई परेशानी उत्पन्न न हो सके। वन वि•ााग के अधिकारी गण गौरैया संरक्षण के लिए जनपद के सभी रैंजो में शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में अब तक लगभग 800 से ज्यादा लकड़ी के घोेसले छात्रों के बीच वितरण किया जा चुका है। इस कार्य को लेकर वन विभाग के अधिकारीगण व कर्मचारी जोरो पर लगे हुए है। प्रदेश सरकार ने वन विभाग और शिक्षा विभाग को इस अहम कार्य के लिए जोड़ा है। विश्व गौरैया दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री ने सभी जिलों में आदेश जारी कर दिया है कि 20 मार्च को गौरैया दिवस के अवसर पर वन विभाग द्वारा एक 15 मिनट की डाक्युमेंट्री फिल्म है। जो सभी जिलों के सिनेमा घरो में पहले शो में बच्चों को दिखाया जायेगा। इस फिल्म में गौरैयां के संरक्षण के बारे में दिखाया जायेगा कि कैसें करे गौरैया का बचाव और गौरैया का घर बसाने में मदद एंव सहयोग करें। आजमगढ़। आज चारो तरफ गौरैया संरक्षण पर वन विभाग से लगाये तमाम विभागों द्वारा प्रयास किये जा रहे है जिसके लिए लकड़ी के आर्टीफिशयल घोंसलों को लोगो वितरित किया जा रहा है जबकि गौरैया की घटती संख्या का प्रमुख कारण गांवों एंव शहरों में कच्चे मकान न होना प्रमुख है । इस शहरी करण एंव कंकरीट के मकानों के चलते गौरैया अपने घोंसलों को नही बना पा रही है । और यदि कही मकानों के कोनों में घोंसला बना कर अण्डें दे भी देती है तो वह मकानों की अत्यधिक तपन के कारण खराब होकर चुजों में परिवर्तित नही हो पाती है। जिससें उनकी संख्या दिनों दिन घटती जा रही है। जिससें पर्यावरण को तमाम तरह से नुकसान हो रहा है और अब शासन-प्रशासन इस गौरैया प्रजाति को बचानें के लिए युद्व स्तर पर प्रयास कर रहा है। हमे पुन:अपने कच्चे मकानोंं की ओर लौटना होगा तभी हम गौरैया प्रजाति को बचानें में पूर्ण रूप से सफल होंगें। उक्त बाते शिक्षक मनोज कुमार त्रिपाठी ने व्यक्त किया। वहीँ इस संबध में पूछे जाने पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राकेश कुमार ने बताया कि गौरैया सरंक्षण के लिए 14 मार्च को स•ाी विद्यालयों में सुबह नौ बजे शपथ दिलाया जायेगा। रही बात डाक्यूमेंट्री फिल्म दिखाने की तो अ•ाी कोई मेरे पास शासन से रिपोर्ट नही आई है यदि आती है तो बच्चों को फिल्म दिखाया जायेगा।
छात्रों को 14 मार्च को दिलाया जायेगा शपथ
20 मार्च को बच्चे देखेंगे डाक्यूमेंट्री फिल्म
आजमगढ़। चूं.चूं करती गौरैया फिर आंगन में लौटेंगी। इसके लिए वन विभाग ने गौरैयों के आवास और प्रजनन के लिए लकड़ी के घोंसले बनवाकर बच्चों में वितरण का कार्य शुरू किया है। 20 मार्च को मनाए जाने वाले विश्व गौरैया दिवस से पहले विभाग को इस कवायद का रिजल्ट देना है। गौरैयां की संख्या कम होने से वातावरण,बारिस व आक्सीजन पर प्रभाव पड़ रहा है। शहरीकरण के चलते आधुनिक घरों में गौरैया को घोंसला बनाना दूभर हो गया है क्योकि ज्यादा तक गौरैया कच्चे मकान व पेड़ो पर ही घोसला लगाती है। पेड़ पौधे कट रहे है और वातवरण में प्रदूषण बढ़ रहा है जिसके चलते गांवों / शहरों में मोबाइल टॉवरों का जाल फैल रहा है। मोबाइल टॉवरों की इलेक्ट्रो मैगनेटिक किरणें गौरैया प्रजाति को कम रही है इसके साथ ही साथ इनके अंन्दर प्रजनन की क्षमता कम हो रही है। हमारे पूर्वजों ने गौरैया के संरक्षण के लिए हर घरों में चावल के दाने बिखेरने की परमपरा रही क्योकि लोगो की मान्यता रही है कि जिन घरो में गौरैया का वास होगा वहां सम्मपन्ता एंव समृद्वि अपने आप ही प्राप्त हो जायेगी। परन्तु वर्तमान परिस्थितियों में हमारी पुरानी मान्यताआें एंव परम्पराआें को लोग भी मान रहे रहे है जिसके चलते आज गौरैया के संरक्षण कि स्थिति उत्पन्न हो गई है। आज आवश्कता इस बात कि है कि हम पुन:गौरैया को बचाने के लिए अपने घरों में अन्न के दानो को बिखेरे एंव साथ ही साथ उनके घोसलोें के निर्माण के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध कराये। या फिर लकड़ी के बनावटी घोसलों को अपने घरो में झूलो की तहर लटकाने की व्यवस्था करे जिससें गौरैया के प्रजाति को बचा कर अपने वातावरण कि रक्षा कर सकें। घर के बड़े बुर्जुगों की नैतिक जिम्मेदारी है कि वह छोटे बच्चों को गौरैया के विषय में जानकारी दे एंव उनके घोसलो से बच्चों को दूर रखने की हिदायाद दे ताकि वह प्राकृतिक एंव सहज रूप से प्रजनन एंव अपने अण्डो की रक्षा करने में कोई परेशानी उत्पन्न न हो सके। वन वि•ााग के अधिकारी गण गौरैया संरक्षण के लिए जनपद के सभी रैंजो में शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में अब तक लगभग 800 से ज्यादा लकड़ी के घोेसले छात्रों के बीच वितरण किया जा चुका है। इस कार्य को लेकर वन विभाग के अधिकारीगण व कर्मचारी जोरो पर लगे हुए है। प्रदेश सरकार ने वन विभाग और शिक्षा विभाग को इस अहम कार्य के लिए जोड़ा है। विश्व गौरैया दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री ने सभी जिलों में आदेश जारी कर दिया है कि 20 मार्च को गौरैया दिवस के अवसर पर वन विभाग द्वारा एक 15 मिनट की डाक्युमेंट्री फिल्म है। जो सभी जिलों के सिनेमा घरो में पहले शो में बच्चों को दिखाया जायेगा। इस फिल्म में गौरैयां के संरक्षण के बारे में दिखाया जायेगा कि कैसें करे गौरैया का बचाव और गौरैया का घर बसाने में मदद एंव सहयोग करें। आजमगढ़। आज चारो तरफ गौरैया संरक्षण पर वन विभाग से लगाये तमाम विभागों द्वारा प्रयास किये जा रहे है जिसके लिए लकड़ी के आर्टीफिशयल घोंसलों को लोगो वितरित किया जा रहा है जबकि गौरैया की घटती संख्या का प्रमुख कारण गांवों एंव शहरों में कच्चे मकान न होना प्रमुख है । इस शहरी करण एंव कंकरीट के मकानों के चलते गौरैया अपने घोंसलों को नही बना पा रही है । और यदि कही मकानों के कोनों में घोंसला बना कर अण्डें दे भी देती है तो वह मकानों की अत्यधिक तपन के कारण खराब होकर चुजों में परिवर्तित नही हो पाती है। जिससें उनकी संख्या दिनों दिन घटती जा रही है। जिससें पर्यावरण को तमाम तरह से नुकसान हो रहा है और अब शासन-प्रशासन इस गौरैया प्रजाति को बचानें के लिए युद्व स्तर पर प्रयास कर रहा है। हमे पुन:अपने कच्चे मकानोंं की ओर लौटना होगा तभी हम गौरैया प्रजाति को बचानें में पूर्ण रूप से सफल होंगें। उक्त बाते शिक्षक मनोज कुमार त्रिपाठी ने व्यक्त किया। वहीँ इस संबध में पूछे जाने पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राकेश कुमार ने बताया कि गौरैया सरंक्षण के लिए 14 मार्च को स•ाी विद्यालयों में सुबह नौ बजे शपथ दिलाया जायेगा। रही बात डाक्यूमेंट्री फिल्म दिखाने की तो अ•ाी कोई मेरे पास शासन से रिपोर्ट नही आई है यदि आती है तो बच्चों को फिल्म दिखाया जायेगा।

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