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आजमगढ़: ठेले पर बीमार बेटे को ले भटक रहे बुजुर्ग पर पड़ी अभिषेक जायसवाल दीनू की नजर...



समाजसेवी ने खुद से पहल कर बीमार को अस्पताल में भर्ती करा इलाज शुरू कराया

आईपी सिटी अस्पताल के डा० नवनीत जायसवाल ने भी पूरी मदद का भरोसा दिया

आजमगढ़: अपने कलेजे के टुकड़े को ठेले पर लाद कर इलाज के लिए दर-ब-दर भटक रहे और नाउम्मीद हो चुके बुजुर्ग पिता को समाजसेवी अभिषेक जायसवाल दीनू का साथ मिल जाने से उनकी लाचारी, बेबसी पर मानवीयता का मरहम लग गया। समाजसेवी अभिषेक जायसवाल दीनू ने न सिर्फ उनके जवान पुत्र को अस्पताल में भर्ती कराया बल्कि कालीनगंज स्थित आईपी सिटी अस्पताल प्रशासन से मिलकर उनके बेहतर उपचार की दिशा में दवा आदि में हरसंभव मदद किए जाने का आश्वासन दिया।
बताया जाता है कि नगर के सिधारी के हाईडिल के समीप निवासी हरिश्चन्द्र को ठेला चलाकर किसी तरह दो वक्त की रोटी मयस्सर हो पाती है। इसी कठिनाईयों के बीच इनके पुत्र निखिल के पैरों में कई दिनों से परेशानी उत्पन्न हो गई थी, आर्थिक विपन्नता के कारण इलाज में देरी हो गया और हालत हुई कि वह नित्य क्रिया में भी असमर्थ हो गया। ठेला चालक हरिश्चन्द्र ने अपनी माली हालत को देखते हुए किसी तरह आष्युमान कार्ड बनवाया था लेकिन वक्त की मार ही थी कि जब पुत्र निखिल को स्वास्थ्य की समस्या हुई तो आयुष्मान कार्ड के बावजूद उसे उपचार नहीं मिल पाया। हरिश्चन्द्र का आरोप कि किसी अस्पताल ने उनका साथ नहीं दिया बल्कि जिला अस्पताल से भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी। जवान बीमार बेटे निखिल को जिला अस्पताल से ठेला पर लादकर अपने पत्नी के साथ घर लौटने को मजबूर हो गया। जैसे ही डीएवी के पास समाजसेवी अभिषेक जायसवाल दीनू की नजर बुजुर्ग दम्पत्ति पर पड़ी तो उन्होंने इन्हें रोकवाया और इनकी आपबीती को सुना। बुर्जुग दम्पत्ति ने बिलखते हुए अपने बेटे की परेशानी का हवाला दिया तो तत्काल दीनू जायसवाल ने मदद की आश्वासन दिया और इन्हें शहर के आईपीसीटी हास्पिटल पर लेकर आए और वहां अपने हाथों से उनके पुत्र को ठेले से उतारा और अपनी निगरानी में आईपी सिटी हास्पिटल के चिकित्सक डा० नवनीत जायसवाल से मुलाकात कराया। समाजसेवी दीनू जायसवाल ने आश्वासन दिया कि इनके इलाज के लिए जो भी होगा उसके लिए वह यथासम्भव मदद करेंगे और एक लाचार पिता के आंसुओं को पोंछने का काम करेंगे। उधर, माली हालत को देखते हुए डा० नवनीत जायसवाल ने भी अस्पताल प्रशासन की तरफ से भी हरसंभव मदद की बात कहीं है। बहरहाल, भले ही दीनू जायसवाल की मदद से बुर्जुग दम्पत्ति के बुढ़ापे की लाठी को बेहतर इलाज मिल गया हो लेकिन सोशल मीडिया पर उनकी वायरल हुई बेबसी ने बहुतेरे समाजिक दलों और व्यवस्थाओं की संवेदनहीनता पर नश्तर चलाते हुए सभी को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

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रिपोर्ट आज़मगढ़ लाइव

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