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आजमगढ़: विपक्षी को फंसाने के लिए पति ने की थी पत्नी की हत्या


जांच के बाद पति व देवर गिरफ्तार, तमंचा व कारतूस बरामद

एक तीर से दो निशाना साधना उल्टा पड़ गया

आजमगढ़ : अराजी अमानी गांव में अंतिमा हत्याकांड का राजफाश करते हुए महराजगंज पुलिस ने गुरुवार की रात साढ़े नौ बजे उसके पति और देवर को घर से गिरफ्तार कर लिया।महिला के पति संतविजय यादव ने अपने सबसे छोटे भाई कन्हैया को विश्वास में लेकर पत्नी की गोली मारकर हत्या कर दी थी और एक तीर से दो निशाना साधते हुए अपने विपक्षियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया था। विवेचना में हकीकत सामने आई तो पुलिस ने दोनों को दबोच लिया और तमंचा भी बरामद कर लिया।
अपर पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ ने पुलिस लाइन सभागार में बताया कि संतविजय यादव के चाचा जयराम ने अपने हिस्से की जमीन दो महिलाओं के नाम से बेच दी थी। आशा देवी की जमीन पर तो कब्जा हो गया था, लेकिन जरीना ने कब्जा करना चाहा, तो संत विजय को लगा कि जमीन हाथ से चली जाएगी। 22 मई को पैमाइश रोकवाने के लिए संत विजय ने मारपीट कर छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया था।फिर उसी रात अपने पिता को गोली मारने की रिपोर्ट दर्ज कराई। मेडिकल रिपोर्ट में गोली लगने का जिक्र नहीं किया गया, तो भाई से मिलकर पत्नी अंतिमा को गोली मार दिया और विपक्षियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया था।
अंतिमा की हत्या के बाद पुलिस की पूछताछ में जो बातें सामने आई हैं, उसमें यह साफ हो गया कि संत विजय पत्नी को रास्ते से हटाना चाहता था और उसी बहाने विपक्षियों को फंसाना चाहता था।
पुलिस की पूछताछ में उसने बताया कि अंतिमा से शादी नहीं की है बल्कि उसे भगाकर लाया।जब उसे लेकर गांव आया, तो लोगों को जानकारी हो गई कि वह अनुसूचित जाति की है। चट्टी-चौराहे पर चर्चा सुन ग्लानि होती थी।उसी समय ठान लिया था कि पत्नी को रास्ते से हटा देगा। सोचा कि क्यों न एक तीर से दो शिकार किया जाए। उसके बाद भाई की सहमति से पत्नी को मारकर अवैध असलहे को मड़ई में छिपाकर शोर मचाया कि विपक्षियों ने पत्नी की हत्या कर दी। मंशा थी कि विपक्षी जेल चले जाएंगें और चाचा की जो जमीन कब्जे में है वह बच जाएंगी, लेकिन एक तीर से दो निशाना साधना उल्टा पड़ गया।

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रिपोर्ट आज़मगढ़ लाइव

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