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आज़मगढ़: होमियो चिकित्सकों ने डॉ. अनिरुद्ध वर्मा को दी भावभीनी श्रद्धांजलि


होम्योपैथी को राष्ट्रीय पटल पर ले जाने में स्व० डा० अनिरुद्ध वर्मा का अतुलनीय योगदान रहा- डा० भक्तवत्सल

आजमगढ़: भारत की परिकल्पना बिना होम्योपैथी के सम्भव नहीं का स्लोगन देने वाले पूर्व केंद्रीय होम्योपैथी परिषद के सदस्य डॉ. अनिरुद्ध वर्मा के निधन से जिले के चिकित्सक शोक में डूबे हैं। चिकित्सकों द्वारा होम्योपैथिक मेडिकल एसोसिएशन आफ इंडिया के बैनर तले मंगलवार को खत्री टोला स्थित केंद्रीय होमियोपैथी परिषद के पूर्व सदस्य डा. भक्तवत्सल के आवास पर शोकसभा का आयोजन किया गया। चिकित्सकों ने डा. अनिरुद्ध वर्मा को नम आंखों से श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उनके कृतित्व व व्यक्तित्व पर विस्तार से चर्चा की गयी। केंद्रीय होम्योपैथिक परिषद के पूर्व सदस्य एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य होम्योपैथिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ इंडिया डॉ भक्तवत्सल ने कहा कि 31 अक्टूबर को जयपुर में जब मुझे यह समाचार मिला कि मेरे अभिन्न मित्र डॉ अनिरुद्ध वर्मा जी अब इस दुनिया मे नही रहे तो मैं हतप्रभ रह गया। वे विगत दो महीनों से बीमार चल रहे थ। मेरा उनका साथ 30 सालो से भी पुराना था। मेरी उनकी पहली मुलाकात सूर्या ऑडिटोरियम में आयोजित एक सेमिनार में हुई थी। वह दिन और उनका आखिरी दिन इस बीच हमने होम्योपैथी में लंबा सफर तय किया। उनकी ही प्रेरणा से आज हमारा संगठन प्रदेश ही नही देश मे अपना एक स्थान रखता है। उन्होंने कहा कि डॉ वर्मा होमियोपैथी के अग्रज नेता थे। वे होमियोपैथी की बात को तत्परता से कहते थे। होमियोपैथी कैसे आगे बढ़े इस बात को कैसे राजनीतिक मंच तक ले जाकर सरकार के सलाहकारों को अपनी बात बताना वे बाखूबी जानते थे। वे केंद्रीय होम्योपैथी परिषद के 25 वर्षों तक सदस्य रहे। मैं भाग्यशाली हूँ कि उनके साथ मुझे काम करने का अवसर मिला। वे पूरी कौंसिल में बेबाक अंदाज़ के लिए जाने जाते थे। भारत में सबसे ज्यादा होम्योपैथिक सेमिनार कराने वाले व्यक्ति जिन्होंने कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक 35 होम्योपैथिक सम्मेलन कराये। भारत के तमाम विख्यात होम्योपैथिक चिकित्सकों को बुलाना होम्योपैथिक छात्रों को अच्छा माहौल देना और होम्योपैथिक साइंस और पालिसी पर चर्चा करना उनके सम्मेलन की खास बात होती थी। उन्होंने दिल्ली के डॉ धामा जी के साथ मिलकर दिल्ली में 2001 में होम्योपैथी का महा सम्मेलन किया जिसमें उस समय भारत के राष्ट्रपति श्री के.आर नारायण जी मुख्य अतिथि के रूप में आये थे। उन्होंने कहा कि डॉ. हैनिमैन के जन्मदिवस 10 अप्रैल को विश्व होम्योपैथिक दिवस के रूप में मनवाने का श्रेय डॉ अनिरुद्ध वर्मा को ही जाता ह। अनिरुद्ध वर्मा को सच्ची श्रद्धांजलि यही है कि हम सब उनके कार्याे को आगे बढ़ाए होम्योपैथी विधा के सभी डॉक्टर्स, टीचर्स, रिसर्चर एवं छात्रों को साथ लेकर चलें और होम्योपैथी को उस मुकाम तक ले चले जिसके लिए डॉ अनुरुद्ध वर्मा प्रयासरत रहें। इस मौके पर डॉ प्रमोद गुप्ता, डॉ देवेश दुबे, डॉ नेहा दुबे, डॉ अनुतोष वत्सल ,डॉ राजेश तिवारी, डॉ ए के राय, डॉ एस के राय, डॉ रणधीर सिंह, डॉ राजकुमार राय, डॉ सी जी मौर्य, डॉ राजीव आनंद, डॉ प्रभात, डॉ मनोज मिश्रा आदि उपस्थित थे।

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रिपोर्ट आज़मगढ़ लाइव

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