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आज़मगढ़: आरिज उर्फ जुनैद को फांसी की सजा पर स्तब्ध है पूरा गांव


बोले ग्रामीण, काफी पहले गांव छोड़ दिया था परिवार

कब और कैसे बुरी सोहबत में पड़ गया किसी को पता नहीं

आजमगढ़ : पूरा परिवार पढ़ा-लिखा, खुद कर रहा था मुजफ्फरपुर से बीटेक। कब और कैसे बुरी सोहबत में पड़ गया, इसकी जानकारी किसी को नहीं है। हां, फांसी की सजा की जानकारी के बाद पूरा गांव स्तब्ध है। जिला मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर उत्तर बिलरियागंज थाना क्षेत्र के नसीरपुर गांव में सबकुछ सामान्य तो दिखा लेकिन लोगों के चेहरे का भाव जरूर बदला था। मीडिया ने लोगोें से इस मुद्दे पर बात करने का प्रयास किया तो एक ही जवाब कि कुछ मत पूछिए, हम लोगों को कोई जानकारी नहीं है।
हां, इतना मालूम है कि पूरा परिवार पढ़ा-लिखा है। आरिज तीन भाइयों में बड़ा है और बीटेक करने के लिए मुजफ्फरपुर गया था। वहां कैसे और किन परिस्थितियों में बुरी सोहबत में पड़ा, इसकी जानकारी किसी को नहीं है। आरिज के दो छोटे भाई दिल्ली में रहते हैं। पिता का इंतकाल हो चुका है और मां पहले शहर में रहती थीं, इस समय कहां है, नहीं पता। आरिज के पिता जफरे आलम पांच भाइयों में सबसे छोटे थे और दिल्ली में कोई काम करते थे। दूसरे नंबर के भाई फखरे आलम बिलरियागंज में डाक्टर हैं। गांव वालों के अनुसार तीसरे नंबर के भाई बदरे आलम आइएएस थे। 
ग्रामीणों को जब पता चला कि 19 सितंबर 2008 को दिल्ली के बाटला एनकाउंटर में शहीद हुए क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा के मामले में आरिज खान उर्फ जुनैद को अदालत ने दोषी करार दिया है तो वे स्तब्ध रह गए। बात करने की बजाय मौन साध लिया। शहर के जिस जालंधरी मुहल्ले में उसकी मां तबस्सुम रहती थीं वहां भी सन्नाटा पसरा रहा। फिलहाल इस समय अरिज के परिवार के बाकी सदस्य कहां रह रहे हैं, इसकी जानकारी किसी को नहीं है।

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रिपोर्ट आज़मगढ़ लाइव

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