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आज़मगढ़: 02 माह के जुड़वां बच्चों की मौत से मचा कोहराम



बोले परिजन, दोनों को आधी रात में आंगनबाड़ी से मिले पैकेट का दूध पिलाया गया था

चिकित्सकों ने फूड प्वाइजनिंग या दम घुटने से मौत का अंदेशा व्यक्त किया,नही हुआ पोस्टमॉर्टम

आजमगढ़: मुबारकपुर थाना क्षेत्र के काशीपुर गांव में शनिवार को जुड़वा बच्चों के मरने से परिवार में कोहराम मच गया। स्वजनों के अनुसार दोनों बच्चों को रात एक बजे आंगनबाड़ी से मिले पैकेट का दूध पिलाया गया था। घटना की जानकारी के बाद मौके पर पहुंचे चिकित्सकों ने कहा कि मौत का कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही स्‍पष्‍ट हो सकेगी। वहीं परिवार के लोगों ने पोस्टमार्टम कराने से इंकार करते हुए शव को दफन कर दिया। मौके पर पहुंचे चिकित्सकों ने फूड प्वाइजनिंग या दम घुटने से बच्चों के मरने का अंदेशा व्यक्त किया है। कब्रिस्तान पर मामले की जांच की मांग को लेकर ग्रामीण अड़े थे लेकिन जब पोस्टमार्टम की बात आई तो सभी शांत हो गए। काशीपुर निवासिनी मधुबाला पत्नी दिवाकर राम को दो माह पूर्व निजी अस्पताल में जुड़वा बच्चे पैदा हुए। स्वजनों के अनुसार जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ थे। शुक्रवार की रात एक बजे मधुबाला ने दोनों बच्चों को आंगनबाड़ी से मिले पैकेट के दूध का घोल बनाकर पिलाया और सो गईं। शनिवार की भोर में चार बजे देखा तो होश उड़ गए। उनकी चीख सुनकर आसपास के लोगों के साथ ग्राम प्रधान कमला देवी, आशा बहू, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी मौके पर पंहुचीं और लगभग 30 परिवारों में वितरित किए गए दूध को प्रयोग करने से मना किया। ग्रामीणों की सूचना पर स्वास्थ्य केंद्र सठियांव के प्रभारी बृजेश कुमार, डा. प्रशांत कुमार राय, अलीम अख्तर ने मौके का मुआयना कर बताया कि बच्‍चों की मौत का मूल कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चलेगा।

दो माह के बच्चे को पिला दिया छह माह के बच्चों का दूध
मुबारकपुर थाना क्षेत्र के काशीपुर गांव में दो दुधमुंहे बच्चों की मौत के बाद मौके पर पहुंचे मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी डीके राय ने स्वजनों के आरोपों की जांच के बाद बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों से वितरित होने वाला स्किंड मिल्क पराग ब्रांड के दूध का पैकेट छह माह के ऊपर के बच्चों और गर्भवती तथा धात्री महिलाओं के उपयोग के लिए होता है। यह सुझाव पैकेट पर भी लिखा होता है। उन्होंने बताया कि मौके पर नेस्ले लेक्टोजेन प्रथम का भी डिब्बा पाया गया। जानकारी मिली कि दोनों दूध को मिलाकर पिलाया गया है। दोनों ही दूध का पैकेट एक्सपायरी डेट से बाहर नहीं है जिसे छह माह के ऊपर के ही बच्चों को पिलाया जा सकता है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि फिर भी मृत बच्चों के घर से दूध के पैकेट के साथ ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के पास उपलब्ध पैकेट व सठियांव स्थित उस दुकान से नेस्ले लेक्टोजेन प्रथम का नमूना लिया गया जहां से खरीदा गया था।उधर जिला कार्यक्रम अधिकारी मनोज कुमार मौर्य ने बताया कि विभाग की तरफ से वितरित किए जाने वाले स्किंड मिल्क केवल छह माह के ऊपर के बच्चों, गर्भवती व धात्री महिलाओं के उपयोग के लिए दिया जाता है। इसका वितरण आंगनबाड़ी कार्यकर्ता चंपा देवी द्वारा मृत बच्चों की मां के लिए दिया गया था।

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रिपोर्ट आज़मगढ़ लाइव

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