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आज़मगढ़: पत्रकारिता को भी विशेष संवैधानिक अधिकार दिये जाने की जरूरत है- एन पी सिंह, पूर्व डीएम



जर्नलिस्ट क्लब की नवगठित कार्यकारिणी का शपथग्रहण समारोहपूर्वक सम्पन्न हुआ

पत्रकारिता की चुनौतियां व पत्रकारों की सुरक्षा विषयक राष्ट्रीय विचार संगोष्ठी भी हुई

आजमगढ़। जर्नलिस्ट क्लब की नवगठित कार्यकारिणी के शपथग्रहण समारोह के अवसर पर शुक्रवार को नेहरू हाल में बदलते दौर में पत्रकारिता की चुनौतियां व पत्रकारों की सुरक्षा विषयक राष्ट्रीय विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
संगोष्ठी को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित करते हुए पूर्व जिलाधिकारी एनपी सिंह ने कहा कि पत्रकारिता को भी विशेष संवैधानिक अधिकार दिये जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत में हमेशा पत्रकारिता और पत्रकारों पर अंकुश लगाने का काम किया जाता रहा है। इसके विपरीत अमेरिका में जब पहला संविधान संशोधन किया गया तो पत्रकारिता को और अधिक अधिकार दिया गया। श्री सिंह ने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए देश के चौथे स्तम्भ को मजबूत करना होगा। 
दिल्ली के वरिष्ठ पत्रकार और प्रेस क्लब आफ इंडिया के पूर्व सचिव संजय सिंह ने कहा कि पत्रकारों को भी अपनी सीमाएं तय करनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि आज पत्रकार खुद ही अपने आप को जज की भूमिका में रखता है। वह सही व गलत का फैसला करने लगता है। यदि पत्रकार केवल न्यूज लिखे, उसमें ब्यूज न घुसेड़े, तो उसे कभी सुरक्षा की जरूरत नहीं पड़ेगी।
वरिष्ठ पत्रकार अरविन्द चतुर्वेदी ने कहा कि पत्रकारिता के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती यह है कि उसके सेवा सुरक्षा की कोई गारन्टी नहीं है। कब, किसे नौकरी से निकाल दिया जायेगा, यह तय नहीं होता है। इसके लिए पत्रकारों के संगठन को एक फण्ड एकत्रित करने की जरूरत है। यह फण्ड जरूरतमंद पत्रकारों को समय-समय पर दिया जाना चाहिए। यदि ऐसा हुआ तो पत्रकार निर्भीक होकर काम कर सकेगा। सुप्रीम कोर्ट के युवा अधिवक्ता पवन प्रकाश पाठक ने कहा कि पत्रकारिता को चौथा स्तम्भ कहा तो जाता है मगर देश के संविधान में इसका कोई जिक्र नहीं है। उन्होंने कहा कि इसके लिए लड़ाई लडऩे की जरूरत है और वह हर लड़ाई में पत्रकारों के साथ हैं। 
मण्डलायुक्त विजय विश्वास पंत ने कहा कि पत्रकार हमेशा वही चीजें परोसें, जिससे समाज सबक ले सके। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों को भी बहुत सारी जानकारियां मीडिया के माध्यम से ही हासिल होती हैं और उन जानकारियों के आधार पर ही अधिकारी काम करते हैं। 
डीआईजी सुभाष चंद दूबे ने कहा कि पत्रकारों को भी एक प्रशिक्षण दिये जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि समाज के हर तबके के लिए योग्यता तय है, उसी प्रकार से पत्रकारों के लिए भी योग्यता तय होनी चाहिए। योग्यता तय न होने के कारण कई पत्रकार देश, समाज व प्रशासन के सामने कठिनाइयां उत्पन्न कर देते हैं।
काशी पत्रकार संघ के पूर्व अध्यक्ष व वरिष्ठï पत्रकार केडीएन राय ने कहा कि पत्रकारिता पूरी तरह से व्यवसायिक हो गयी है। गांव व किसान की बात करने वाला पत्रकार हासिए पर कर दिया जाता है तथा शासन-सत्ता की चाटुकारिता करने वाला पत्रकार सम्मान पाता है। इस व्यवस्था को बदलना पड़ेगा।
कार्यक्रम की शुरूआत अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलित कर दिया गया. स्वस्ति वाचन और सरस्वती वंदना प्रणब और गौरव के मधुर स्वर से हुई। तत्पश्चात अतिथियों का स्वागत व माल्यार्पण किया गया तथा क्लब के पदाधिकारियों व सदस्यों को पत्रकारिता की आचार संहिता की विधिवत शपथ दिलायी गयी।यह शपथ वरिष्ठ पत्रकार संजय सिंह ने दिलायी. कार्यक्रम के संयोजक अरविन्द कुमार सिंह द्वारा विषय प्रवर्तन के साथ पत्रकारों की सुरक्षा से संबंधित कानून ' उत्तर प्रदेश पत्रकार सुरक्षा अधिनियम बनाने के लिए
राज्यपाल व मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन मण्डलायुक्त को सौंपा गया। जर्नलिस्ट क्लब के गाजीपुर, जौनपुर, मऊ, बलिया, वाराणसी और सोनभद्र के नवगठित इकाई अध्यक्षों को नियुक्ति पत्र भी वरिष्ठ पत्रकार अरविंद चतुर्वेदी के हाथों प्रदान किया गया. जिसमें सोनभद्र से विवेक पांडेय, मऊ से मुरली मनोहर पांडेय, गाजीपुर से अमरजीत राय, जौनपुर से राजन मिश्रा आदि लोग थे.
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ स्तम्भकार विजयनारायण ने व संचालन जर्नलिस्ट क्लब के अध्यक्ष आशुतोष द्विवेदी ने किया। समापन अवसर पर आभार ज्ञापन क्लब के संयोजक अरविन्द सिंह ने किया। कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख लोगों में अब्दुल कादिर बागी, राम अवध यादव, एसके दत्ता, सुभाष सिंह, रामसिंह गुड्डू, राजेश चंद मिश्र, खुर्रम आलम नोमानी, राजीव श्रीवास्तव, महेंद्र सिंह, वसीम अकरम, रत्न प्रकाश त्रिपाठी, दिनेश चन्द्र श्रीवास्तव,पवन उपाध्याय, सचिन श्रीवास्तव, आशुतोष श्रीवास्तव, संदीप अस्थाना, मनीष पाण्डेय, देवेन्द्र मिश्र, गौरव श्रीवास्तव, कयामुद्दीन, विकास गुप्ता, उमेश राय, प्रशांत राय, अमित राय, मिथिलेश पाण्डेय, नागेन्द्र वर्मा, प्रदीप यादव, राकेश वर्मा, संतोष गोलवारा, वेदप्रकाश सिंह लल्ला, अमन गुप्ता आदि पत्रकारों के अलावा समाज के हर तबके से जुड़े लोग मौजूद रहे।

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