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आजमगढ़: राष्ट्रीय होमियोपैथिक सेमिनार में देश के दिग्गज चिकित्सकों ने किया विमर्श

होमियोपैथ पद्धति देश की चिकित्सा सेवा का महत्वपूर्ण अंग ,ऐसी सस्ती पद्धति को आगे बढ़ाना हम सभी की जिम्मेदारी है- फागू चौहान , राज्यपाल , बिहार  

चिकित्सकों ने आजमगढ़ के राजकीय होमियोपैथिक मेडिकल कालेज में एमडी की पढ़ाई शुरू कराने मांग भी किया 

आजमगढ़: होमियोपैथिक मेडिकल एसोसिएशन व राजकीय होमियोपैथिक मेडिकल कालेज चंडेश्वर के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को राहुल प्रेक्षागृह सिधारी में राष्ट्रीय होमियोपैथिक सेमिनार का आयोजन किया गया। इसमें जहां होमियोपैथिक के विकास पर विस्तार से चर्चा हुई वहीं, विशेषज्ञों द्वारा असाध्य रोगों पर किये गए शोध को तथ्यपरक ढंग से लोगों के सामने रखा गया। विशेषज्ञों ने यह साबित किया कि बिना आपरेशन अथवा दूसरी पैथी की मदद के बिना भी होमियोपैथी गंभीर बीमारियों को जड़ से समाप्त करने में सक्षम है। इस दौरान एलोपैथ की मल्टी नेशनल कंपनियों द्वारा होमियोपैथी को व्यापार बनाने की कोशिश पर चर्चा की गयी। संकल्प लिया गया कि होमियोपैथ के डाक्टर डा. हैनिमन के विचारों और विधा को आगे बढ़ाने का काम करेंगे। साथ ही राजकीय मेडिकल कालेज चंडेश्वर में भी एमडी की पढ़ाई शुरू करने की मांग सेमिनार में मौजूद निदेशक से की गयी। बिहार के राज्यपाल फागू चैहान ने होमियोपैथ चिकित्सा पद्धति को देश की चिकित्सा सेवा का सबसे महत्वपूर्ण अंग बताया और आश्वस्त किया कि होमियोपैथी के विकास के लिए जो भी हो सकेगा करेंगे।
राज्यपाल ने कहा कि होमियोपैथी चिकित्सा पद्धति देश की नहीं बल्कि विश्व की प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों में एक है। आज यहां पूरे देश के चिकित्सकों ने अपने अनुभव को साझा किया। होमियोपैथ जैसी सस्ती पद्धति को आगे बढ़ाना हम सभी की जिम्मेदारी है। चिकित्सकों को लोगों को यह बताना होगा कि होमियोपैथ हमारे लिए उपयोगी क्यों है?, होमियोपैथ आयुर्वेद व एलोपैथ से कहां बेहतर है। क्योंकि आज भी समाज में भ्रांति है कि एतना बड़ा रोग और एतनी छोट गोली का करी। सबको समझाना होगा कि यह छोटी गोली पेट में जाय या न जाय लेकिन अपना काम करती है और इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं है। जहां तक आजमगढ़ में एमडी की पढ़ाई नहीं हो रही है तो मैं आयुष के मंत्री से इस संबंध में बात करूंगा और उसे शुरू कराने का प्रयास करूंगा।
सीसीएच के पूर्व अध्यक्ष अनिरूद्ध वर्मा ने कहा कि सरकार को होमियोपैथी पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। सरकार को चाहिए कि होमियोपैथी को राष्ट्रीय कार्यक्रमों का हिस्सा बनाए। देश में होमियोपैथी के सबसे अधिक कालेज और सबसे अधिक चिकित्सक है। चिकित्सकों ने यह साबित किया है कि इस विधा से असाध्य रोगों को बड़ी आसानी से ठीक किया जा सकता है लेकिन उपेक्षा ही है कि आज हमारे चिकत्सकों को उचित भत्ता तक नहीं मिलता। सरकार को भत्ता बढ़ाना चाहिए।
महाराष्ट्र से आये डा. अरूण भास्मी ने कहा कि केवल महाराष्ट्र में होमियोपैथी के 70 हजार चिकित्सक और 56 कालेज हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद होमियोपैथी कि विकास के लिए पीएम मोदी ने अलग आयुष मंत्रालय का गठन किया लेकिन यह काफी नहीं है। अभी इस क्षेत्र में और काम करने की जरूरत है।
हमाई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. रामजी सिंह ने कहा कि यूपी के ज्यादातर चिकित्सक व शिक्षक संविदा पर। बिहार सरकार ने निर्णय लिया है कि वहां संविदा चिकित्सक व शिक्षक लगातार बने रहेंगे। ऐसी व्यवस्था यूपी में नहीं है। अभी पिछले वर्ष यहां चिकित्सक शिक्षकों को हटाया गया। यह स्थिति ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि यूपी और बिहार के विश्वविद्यालयों में पीएचडी की पढ़ाई नहीं होती है। बाकि राज्यों में यह शुरू है। यह राज्यपाल के अंडर में आता है इसलिए यूपी व बिहार में भी पीएचडी की पढ़ाई शुरू होनी चाहिए। डा. आनंद चतुर्वेदी के अथक प्रयास से इलाहाबाद में एमडी की पढ़ाई शुरू हुई। आजमगढ़ में भी एमडी की पढ़ाई शुरू होनी चाहिए। अब ड. आनंद चतुर्वेदी निदेशक है इसलिए कानपुर की तरह आजमगढ़ का भी प्रस्ताव भेजे।
निदेशक एचएमआई कोलकाता डा. सुभाष सिंह ने कोलकता में 10 व 11 अप्रैल को आयोजित होने वाले विश्व होमियोपैथिक दिवस पर सभी को आमंत्रित किया।
निदेशक होमियोपैथिक उप्र डा. आनंद चतुर्वेदी ने कहा कि हमें राष्ट्र निर्माण के लिए होमियोपैथी की उपयोगिता पर विचार करने के साथ ही यह भी कोशिश करनी है कि देश को कैसे स्वस्थ्य रख सकते है।
आयोजन समिति के अध्यक्ष डा. भक्तवत्सल ने आगंतुकों का आभार जताया और कहा कि होमियोपैथी अपनी गुणवत्ता पर समाज में लोकप्रिय होती जा रही है। इस चिकित्सा पद्धति में डा. हैनीमन के सिद्धांतों पर चलकर ही सफलता हासिल की जा सकती है। होमियोपैथिक को ऊंचाई तक ले जाना हम सभी की जिम्मेदारी है। प्राचार्य राजकीय होमियोपैथी मेडिकल कालेज डा. राजेन्द्र राजपूत ने कहा कि सरकार ने होमियोपैथी पर ध्यान दिया है लेकिन यह काफी नहीं है। होमियोपैथी कि विकास के लिए अपने प्रयास को और बढ़ाने की जरूरत है। लखनऊ के डा. पंकज श्रीवास्तव ने अर्थराइटिस पर अपना शोध प्रस्तुत किया।
इसके पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ बिहार के राज्यपाल फागू चैहान, अध्यक्ष हमाई डा. रामजी सिंह, निदेशक उप्र होमियोपैथी डा. आनंद चतुर्वेदी, सचिव एचएमएआई डा. संजय मिश्र, पूर्व उपाध्यक्ष सीसीएच डा. अरूण भास्मे, निदेशक एनआईएच कोलकता डा. सुभाष सिंह, चेयरमैन होमियोपैथिक मेडिसिन बोर्ड डा. बीएन सिंह, डा. वीबी सिंह ने होमियोपैथी के जनक डा. हैनिमन की प्रतिमा पर माल्यापर्ण व दीप प्रज्ज्वलित व माल्यापर्ण कर किया। इस दौरान छात्राओं द्वारा सरस्वती वंदना व स्वागतगीत प्रस्तुत किया गया। राज्यपाल द्वारा चिकित्सा के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए डा. सुभाष सिंह निदेशक एनआईए बंगाल, डा. महेंद्र प्रताप सिंह, डा. हर्ष निगम को डा. डीपी रस्तोगी अवार्ड, डा. आनंद चतुर्वेदी को होमियोकर्मी कर्मयोगी अलंकरण, भोपाल की डा. रीना सिंह को नारी शक्ति सम्मान, डा. धर्मराज सिंह, डा. अशोक सिंह, डा. लालचंद राम को डा. महेंद्र प्रताप सिंह मेमोरियल अवार्ड तथा डा. पवन पारिक आगरा, डा.निशांत श्रीवास्तव लखनऊ, पंकज श्रीवास्तव को स्पीकर अवार्ड से सम्मानित किया गया। संचालन डा. प्रमोद गुप्ता ने किया।
सेमिनार को सफल बनाने में डा. राजेश तिवारी, डा. प्रमोद गुप्ता, डा नेहा दुबे, डा. स्फूर्ति सिंह, डा. पूजा पांडेय, डा. नवीन दुबे, डा. देवेश कुमार दूबे, डा. रणधीर सिंह, डा.धर्मराज सिंह, डा.एके राम, डा. वी. पांडेय, डा. सीजे मौर्य, डा. राजीव आनन्द, डा. एके सिंह, डा. एसपी सिंह, डा. एस.के. राय, डा. राजीव आनन्द, डा. मनोज मिश्रा, डा. प्रभात, डा. अशोक सिंह, डा. अभिषेक पांडेय, डा. डीपी सिंह, डा. अशोक सिंह, डा. श्यामनरायण सिंह, डा. सलमानी, डा. रणधीर सिंह, डा. वी पांडेय, डा. अमन पांडेय, डा. विनीता मिश्रा, अनूपमा दुबे, डा. एके सिंह, डा. अनुराग श्रीवास्तव, डा. गिरीश श्रीवास्तव, डा. मुस्ताक, डा. अखिलेश आदि का विशेष योगदान रहा।

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रिपोर्ट आज़मगढ़ लाइव

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