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आजमगढ़ : पेरीसिल्वीयन ग्लायोमा नामक बीमारी का लाइफ लाइन हॉस्पिटल में हुआ सफल ऑपरेशन

बनारस, लखनऊ एवं दिल्ली में दिखाने के बाद आया था लाइफ लाइन हॉस्पिटल : डॉ0 अनूप 

आजमगढ़ : ऑपरेशन शब्द सुनते ही मरीज के घरवाले परेशान होने लगते हैं अब जरा सोचिए जिस शख्स के दिमाग का ऑपरेशन हो रहा हो उसे और उसके घर वालों को यह पता हो उसका ऑपरेशन होशो-हवास में होना है तो उनकी मन की स्थिति क्या रही होगी।
जिस मरीज हम बात कर रहे है उसका नाम प्रभाकर (36) है जो आजमगढ़ जिले के रानी की सराय थाना क्षेत्र का रहने वाला है। उसके परिवार में पत्नी है दो बच्चे हैं प्रभाकर को पेरीसिल्वीयन ग्लायोमा नामक बीमारी थी। बनारस, लखनऊ एवं दिल्ली में दिखाने के बाद अंततः यह लाइफ लाइन हॉस्पिटल पहुंचा। जहां हॉस्पिटल के वरिष्ठ न्यूरो सर्जन डॉ अनूप कुमार सिंह द्वारा इस बीमारी का परमानेंट इलाज ऑपरेशन बताया गया। इस आपरेशन का सबसे गम्भीर पहलु यह था कि प्रभाकर के दिमाग में स्थित ट्यूमर ठीक उस जगह पर था जहा से हमारे दाहिने हाथ एवं पैरो का नियंत्रण होता है एवं उसी जगह पर हमारा स्पीच सेन्टर (आवाज का केन्द्र) होता है। इस आपरेशन का सबसे बड़ा खतरा यह था कि आपरेशन के बाद मरीज की आवाज जा सकती थी, एवं उसके दाहिने तरफ लकवे का असर भी हो सकता था। इस खतरे को खत्म करने के लिए प्रभाकर को आधुनिकतम जाँचो की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा, जिनके द्वारा डाक्टरो की टीम ने दिमाग में स्थित इन केंद्रों की पहचान की लेकिन फिर भी लकवे के खतरो को कम करने के उदेश्य से पूरे आपरेशन को होशो-हवास में करने का निर्णय लिया गया। एक बार तो घरवालों की हिम्मत जवाब दे गई लेकिन उन्हें डॉक्टर पर पूरा विश्वास था। अब समस्या यह थी कि ब्रेन के इस ऑपरेशन के दौरान मरीज को होश में रखना था I मरीज को 4 से 5 घंटे तक होश में रखने का काम करने के लिए एक कुशल एनएसथीसिया की जरूरत थी लिहाजा अब न्यूरो सर्जन के साथ-साथ एनेस्थीसिया के डॉक्टर को भी पूरी तरह से तैयार रहना था I चुनौती आसान नहीं थी इस ऑपरेशन में हाईटेक मशीनों के अलावा लाइफ लाइन हॉस्पिटल कि सीनियर डॉक्टर डॉ गायत्री ने मरीज को पूरे ऑपरेशन के दौरान होश में रखने का जिम्मा संभाल लिया I यह इतना आसान भी नहीं था। लिहाजा मरीज की काउंसलिंग डॉ गायत्री ने की। इस पूरी प्रक्रिया में लगभग 5 दिन लग गए। ऑपरेशन शुरू हुआ एक तरफ जहां न्यूरो सर्जन डॉ अनूप कुमार सिंह एवं उनकी टीम नवीनतम तकनीको जिनमें नेविगेशन, आधुनिकतम माइक्रोस्कोप के विशेष फिल्टर का प्रयोग कर ट्यूमर निकाल रहे थें। वही ब्रेन मैपिंग तकनीकी के द्वारा वह लकवे से सम्बन्धित जगहों को बचा रहे थे। वही दूसरी तरफ डॉ गायत्री एवं उनकी टीम मरीज से समय-समय पर बात कर रही थी। इस दौरान प्रभाकर ने डॉ गायत्री से बातचीत में जहां अपने पूरे परिवार की बातें शेयर की वही अपने फेवरेट सिंगर किशोर कुमार के गानों को सुनने की भी फरमाइश की पहली बार ऐसा हो रहा था जब ऑपरेशन थिएटर के अंदर ओटी के सामानों के साथ किशोर कुमार के गाने भी बज रहे थे। डॉ0 अनूप ने बताया कि आपको यह जानकर आश्चर्य होगा अपने ऑपरेशन के दौरान प्रभाकर खुद भी गाना गा रहा था। लगभग 5 से 6 घंटे तक चले ऑपरेशन के बाद प्रभाकर कुछ दिनों हॉस्पिटल में एडमिट रहा और आज प्रभाकर पूरी तरह से ठीक होकर अपने परिवार के साथ आपके सामने हैं कुल मिलाकर के इस ऑपरेशन में लाइफ लाइन की एक स्पेशल टीम जिसमें डॉ नरेश कृष्णानी, डॉ शंकर इत्यादि लोग शामिल रहे उनकी लगन कर्तव्यनिष्ठा के चलते ऑपरेशन पूरी तरह से सफल रहा।

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रिपोर्ट आज़मगढ़ लाइव

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