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आजमगढ़ :शहीद रामसमुझ यादव ने कारगिल युद्ध के दौरान अदम्य साहस दिखाया था

30 अगस्त को शहादत दिवस पर उनके पैतृक गांव में श्रद्धांजलि सभा का होता है आयोजन

इस बार 25 अन्य शहीद के परिवारों के साथ पुलवामा के पांच शहीदों के परिजन होंगे सम्मानित

आजमगढ़ : जिले के सगड़ी क्षेत्र के नत्थूपुर गांव निवासी कारगिल शहीद रामसमुझ यादव ने कारगिल युद्ध के दौरान जिस बहादुरी व अदम्य साहस दिखाया, वह बेमिसाल है। वो आखिरी दम तक दुश्मनों से लोहा लेते रहे।
रामसमुझ यादव का जन्म 30 अगस्त 1977 को एक किसान परिवार में हुआ था। बचपन से ही मन में देश सेवा का जज्बा रखने वाले रामनाथ यादव व प्रतापी देवी का बेटा 1997 में वाराणसी में आर्मी में भर्ती हुआ।उन्होंने हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की शिक्षा मौलाना आजाद इंटर कालेज अंजान शहीद और स्नातक की शिक्षा श्री गांधी पीजी कालेज मालटारी से ग्रहण की थी। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार में जन्म लेने वाले वे सबसे बड़े बेटे थे। छोटे भाई प्रमोद यादव और छोटी बहन मीना की भी जिम्मेदारी उन्हीं के कंधे पर थी। बावजूद इसके उन्होंने लगन से पढ़ाई की और देश सेवा का जज्बा लिए आर्मी में भर्ती हो गए। कारगिल की लड़ाई में पड़ोसी देश की सेना से लोहा लेते हुए 30 अगस्त के दिन ही 1999 में देश की आन-बान और शान की रक्षा करते हुए शहीद हो गए। उनकी शहादत में हर वर्ष 30 अगस्त को उनके पैतृक गांव स्थित शहीद पार्क में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया जाता है। 
शहीद रामसमुझ यादव के छोटे भाई प्रमोद यादव ने बताया कि इस बार शहीद मेले में पुलवामा हमले में शहीद हुए पूर्वांचल के पांच शहीद पंकज कुमार त्रिपाठी महराजगंज, विजय कुमार मौर्य देवरिया, महेश यादव प्रयागराज, अवधेश कुमार चंदौली और रमेश यादव वाराणसी के परिजन सम्मानित किए जाएंगे। इसके साथ ही 25 अन्य शहीदों के परिजनों को कुमाऊं रेजीमेंट के डिप्टी कमांडेंट कर्नल निखिल श्रीवास्तव सम्मानित करेंगे। 

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रिपोर्ट आज़मगढ़ लाइव

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