आजमगढ़: शहर के पुरानी कोतवाली क्षेत्र की ऐतिहासिक और वर्तमान में एकमात्र श्री राम लीला का शुभारंभ सोमवार की देर शामसमाजसेवी अभिषेक जायसवाल दीनू ने भगवान गणेश की आरती कर किया। सर्वप्रथम भगवान शिव की झांकी, मां दुर्गा और गणेश की पूजा के बाद रामायण की आरती के साथ ही रामलीला का शुभारंभ किया गया । रामलीला में पहले दिन नारद तपस्या का मंचन किया गया। सोमवार को मंचन में नारद जी हिमालय पर्वत पर धूनी रमाए बैठे थे। तभी इसकी सूचना भगवान इंद्र को हो गई और उन्हें यह लगा की नारद उनका सिंहासन लेना चाहते हैं। इंद्र ने उनका ध्यान भंग करने के लिए कामदेव से संपर्क किया। कामदेव सुंदरियों को लेकर भगवान नारद का मोहभंग कराने पहुंचे, जब नारद का मोह भंग हुआ तो उन्होंने बताया कि भगवान इंद्र को लगता है कि मै उनका सिंहासन लेना चाहता हूं पर ऐसा नहीं है। इस प्रसंग के बाद नारद घूमते-घूमते राजा श्रृंगी के दरबार में पहुंचते हैं। वहां राजा सेन की उम्र का आदर सत्कार करते हैं और अपनी पुत्री को जानने के लिऐ सामने बुलाते हैं। राजकुमारी की सुंदरता को देखकर नारद मोहित हो जाते हैं और वह उससे विवाह करने के लिए तरह-तरह के उपाय ढूंढने लगते हैं। इसी बीच भगवान विष्णु से उनका सुंदर रूप मांगते हैं पर भगवान विष्णु उनके साथ छल करते हुए उन्हें बंदर का रूप दे देते है। वह रूप लेकर वे राजा श्रृंगी के दरबार में पहुंचते है, जहां नारद की खूब हंसी उड़ाई जाती है। जब नारद को पता चला कि उनके साथ छल हुआ है तो वे क्रोध में आकर भगवान विष्णु को श्राप दे दिये लेकिन जब उनको पता चलता है कि क्रोध में आकर हमसे बहुत बड़ी बहुत बड़ी भूल हुई तो उनको बहुत पछतावा होता है। उद्घाटन सभा का संचालन समिति के संयोजक विभाष सिन्हा ने किया। इस दौरान श्रीराम लीला समिति के अध्यक्ष स्वतंत्र प्रसाद गुप्त महामंत्री डॉ राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, कमल गुप्ता, विनय गुप्ता, चंद्रभान, रामप्रसाद, श्रीचंद, जयप्रकाश, श्रवण कुमार, भोला, संतोष, सुरेश, केसरी, पन्नालाल, संजय, अजय, आदि लोग मौजूद थे।
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