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साहब मै जिन्दा हूँ ,चाहे तो डीएनए टेस्ट करा लीजिये

42 साल पहले अभिलेखों में महिला को मुर्दा घोषित किया गया था 

आजमगढ़ : जिन्दा मुर्दों के लिए पहले से ही मशहूर रहे आजमगढ़ में एक बार फिर एक ऐसी महिला का मामला सामने आया है जिसे अभिलेखों 42 साल पहले ही मार दिया गया था। अब वह मरी हुई महिला जिंदा हो कर लौटी है और अपनी पहचान को डीएनए टेस्ट तक कराने को तैयार है। मामले ने ऐसा तूल पकड़ा कि जिले भर के लोग इसी बारे में चर्चा कर रहे हैं।
महिला के अचानक यूं सामने आने से प्रशासन की परेशानी सबसे ज्यादा बड़ गई है। जी हां, दरअसल, हुआ यूंं कि आजमगढ़, कप्तानगंज थाना के भवनपुर निवासी महिला को अभिलेखों में मृत दिखा दिया गया। यह सब जांच अधिकारी बीडीओ के निर्देश पर किया गया। ग्राम विकास अधिकारी ने बिना गांव में गए और जांच किए महिला की मृत रिपोर्ट लगा दी जिससे कि महिला को मरा हुआ दिखा दिया गया। सरकारी कागजात में महिला की मौत 42 साल पहले दिखा दी गई। जब इस बात की जानकारी महिला को हुई तो उसने गलत रिपोर्ट लगाने का आरोप लगाकर डीएनए टेस्ट कराने की चेतावनी दे दी है ।
भवनपुर निवासी बंशराजी पत्नी स्व. बोधन यादव ने सात अगस्त को संपूर्ण समाधान दिवस पर सगड़ी तहसील में प्रार्थना पत्र दिया। उसने लिखित तौर पर आरोप लगाया कि उसे फर्जीवाड़ा कर अभिलेखों में मृतक दिखा दिया गया जबकि वह जिंदा है। महिला ने बताया कि उसे 1976 में मृतक दिखाया गया है, जबकि उसके पास मौजूद 1988 और 81 की परिवार रजिस्टर की कॉपी में वो जिंदा है। सिर्फ इतना ही नहीं महिला के पास अपना आधार कार्ड भी है। शिकायत संख्या 30096518001917 की जांच के लिए प्रभारी अधिकारी संपूर्ण समाधान दिवस ने बीडीओ बिलरियागंज को अधिकृत किया। बीडीओ ने इसकी जांच ग्राम विकास अधिकारी सत्य प्रकाश सिंह से कराई। आरोप है की सत्यप्रकाश सिंह ने बिना पीडि़ता से मिले और ग्राम प्रधान का बयान लिए, रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी कि बंशराजी पत्नी स्व. बोधन की मौत दिनांक आठ जुलाई 1976 को हो चुकी है।
प्रकरण को निस्तारित कर दिया गया है। पीडि़ता बंशराजी ने बताया कि जांच अधिकारी सत्य प्रकाश सिंह न गांव आए और न ही कोई जांच की। मैं जिन्दा हूं और अपने भतीजे रामकोमल के पास रहती हूं। मेरे पास तीन जीवित शादीशुदा पुत्रियां हैं। यदि कोई शक है तो मेरा डीएनए टेस्ट करा लिया जाए। जांच अधिकारी सत्य प्रकाश सिंह ने मृत्यु प्रमाण-पत्र और शवदाह प्रमाण-पत्र की बात की है। न तो मुझे कोई प्रमाण पत्र दिया जा रहा है और न ही विपक्षी का नाम पता बताया जा रहा है। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि जांच के जिम्मेदारों ने नाजायज लाभ लेकर अपने पद का दुरुपयोग करते हुए उसे मृतक घोषित करने के लिए गलत सूचना परिवार रजिस्टर में भर दी। इसी के चलते रिपोर्ट गलत हो गई। सच्चाई तो ये है कि गांव के कुछ लोग बेईमानी से महिला की सम्पत्ति हड़पना चाहते हैं। बंशराजी नामक इस महिला की उम्र 92 वर्ष हो चुकी है। वहीं गांव में केवल कुछ आबादी की जमीन बची है। महिला ने इसे अपने भतीजे रामकोमल को वसीयत किया है। लेकिन जब तक महिला जीवित है तब तक जमीन पर मालिकाना हक महिला का रहेगा।
महिला का कहना है कि इसी जमीन के लिए उसे मृतक घोषित किया जा रहा है। इस बाबत जब बीडीओ बिलरियागंज से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मामला जानकारी में है। यदि बंशराजी जिन्दा है तो मैं जल्दी ही मिल कर, अभिलेखों की जांच करूंगा और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करूंगा। इस बारे में एसडीएम सगड़ी पंकज कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि प्रकरण संज्ञान में नहीं था। स्वयं गांव में जाकर मामले की जांच करूंगा। यदि किसी कर्मचारी या अधिकारी की ओर से गलत रिपोर्ट लगाई गई है तो इसके बारे में जिलाधिकारी को रिपोर्ट भेजी जाएगी।  

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रिपोर्ट आज़मगढ़ लाइव

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